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जीएम रहते गढ़वा के किशोर इंटरप्राइजेज को ऊंची कीमत पर ठेका दिया था!
बता दें कि तत्कालीन महाप्रबंधक जी कार्तिकेयन पर आरोप लगा था कि जीएम रहते उन्होंने गढ़वा के किशोर इंटरप्राइजेज को ऊंची कीमत पर ठेका दिया था. जबकि कम कीमत पर टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों को इन्होंने नजरअंदाज कर दिया था. जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हुई थी. जिसके बाद सीबीआई ने मई 2015 में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी. आरोपों को सिद्ध करने के लिए CBI के द्वारा कई साक्ष्य और 11 गवाह अदालत के समक्ष पेश किये गए. जबकि बचाव पक्ष ने सिर्फ 4 गवाह पेश किये. CBI के 11 गवाह ये साबित नहीं कर पाये की जी कार्तिकेयन ने टेंडर देने में भ्रष्टाचार किया है. जिसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया. बचाव पक्ष की ओर से रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता शंभू अग्रवाल और रोहित रंजन प्रसाद ने अदालत में पक्ष रखा. इसे भी पढ़ें - रांची:">https://lagatar.in/ranchi-genome-sequencing-machine-has-been-installed-but-the-necessary-equipment-for-testing-has-not-arrived-at-rims/">रांची:जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन इंस्टॉल तो हो गयी, पर जांच के लिए जरूरी उपकरण नहीं पहुंचे हैं रिम्स [wpse_comments_template]

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