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हर बात में विदेशी एंगल ढूंढ़ने वाले पत्रकारों का हश्र देख छात्रों के समर्थन में आये सितारे!

पिछले दिनों साउथ के एक राज्य में था. हम कैब में थे. साथ में छोटा भाई था. एक फिल्म के पोस्टर को देख करके मैंने कहा कि यहां के लोग अपने हीरो को बहुत मानते हैं. भगवान मानते हैं. यह अजीब है. भाई ने हाथ दबाकर चुप रहने का इशारा किया, लेकिन तब तक हम बोल चुके थे. कैब चालक ने मेरी बात सुनने के बाद बिफर पड़ा. उसने कई एक्टर-एक्ट्रेस के अच्छे कामों को गिना दिया. साथ ही बता दिया कि कैसे वे अलग-अलग मुद्दों पर लोगों के साथ खड़े होते हैं, ना कि सरकार की हां में हां मिलाते हैं.
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Lagatar Desk :  ये जो सलमान खान, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, सोनू सूद, अदिती राव हैदरी, हुमा कुरैशी, दिया मिराज, करीना कपूर, वरुण धवन, सारा अली खान, अनन्या पांडेय, सचिन तेंदुलकर, शुभमन गिल, युवराज सिंह, शिखर धवन, ईशान किशन, मोहम्मद कैफ जैसे सितारे छात्रों का समर्थन कर रहे हैं, वह यूं ही नहीं है. इनके समर्थन को देख आप किसी मुगालते में मत रहिये.

 

असल में ये सितारे हर आंदोलन को चीन, पाकिस्तान, जॉर्ज सोरोस से जोड़ने वाले पत्रकारों का हश्र देखकर समर्थन कर रहे हैं. इन्हें डर लगने लगा है कि कहीं इनका सबसे बड़ा दर्शक वर्ग (युवा) नाराज ना हो जाये. क्योंकि इससे पहले किसी जायज मांग को लेकर हुए आंदोलन का इन्होंने समर्थन या विरोध नहीं किया. क्योंकि ये विशुद्ध रुप से व्यापारी हैं.

 

पिछले दिनों साउथ के एक राज्य में था. हम कैब में थे. साथ में छोटा भाई था. एक फिल्म के पोस्टर को देख करके मैंने कहा कि यहां के लोग अपने हीरो को बहुत मानते हैं. भगवान मानते हैं. यह अजीब है. भाई ने हाथ दबाकर चुप रहने का इशारा किया, लेकिन तब तक हम बोल चुके थे. कैब चालक ने मेरी बात सुनने के बाद बिफर पड़ा. उसने कई एक्टर-एक्ट्रेस के अच्छे कामों को गिना दिया. साथ ही बता दिया कि कैसे वे अलग-अलग मुद्दों पर लोगों के साथ खड़े होते हैं, ना कि सरकार की हां में हां मिलाते हैं. इसलिए आम पब्लिक भी उनके साथ खड़ी होती है. सिर पर बैठाती है.

 

इससे अलग हिंदी के सितारे सिर्फ पर्दे के हीरो हैं. एक्टर हैं. अकूत संपत्ति के मालिक हैं. असल में ये सारे व्यवसायी हैं. सरकार के खिलाफ क्या ही बोलेंगे. रांची के ही महेंद्र सिंह धौनी को ले लें. देश के युवा इन्हें कितना मान देते हैं. सम्मान देते हैं. लेकिन छात्रों के मुद्दे पर ये भी चुप हैं. अमिताभ बच्चन, जिसे देश ने यंग्री यंग मैन का दर्जा दिया. महामानव माना, वह भी चुप है. जो बोल रहे हैं, वह सिर्फ इस डर से कहीं उनके प्रति युवाओं में नाराजगी ना आ जाये.

 

असल में छात्रों ने मीडिया के उस तबके को नंगा कर दिया है, उन्हें उनकी जगह दिखा दिया है, जो भक्ति रस में डुबे हुए हैं. यह सिर्फ नौकरी की मजबूरी नहीं है, बल्कि अकूत संपत्ति का मालिक बनने का ख्वाब भी है. अब क्रिकेट और फिल्मी सितारों को भी लगने लगा है कि उन्हें बोलना पड़ेगा. क्योंकि यही पब्लिक उनसे सिर पर बैठाती हैं.

 

 

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