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चाईबासा : आदिवासी जिस जमीन पर रहते हैं वहां संसाधन की प्रचुरता : चित्रसेन सिंकु

 
Chaibasa (Sukesh kumar) : झारखंड पुनरुत्थान अभियान की पदयात्रा बुधवार को कुईडा, डेबरासाई, बिनसाईं, करंजिया, जुलडीहा तक चलकर रुक गया है. पदयात्रा के क्रम में देबरासाई और जुलडीहा में ग्रामीणों के साथ बैठक की गई. बुधवार को पदयात्रा कार्यक्रम का नेतृत्व झारखंड पुनरुत्थान अभियान के जगन्नाथपुर संयोजक मंडली विकास केराई, गुरुचरण सिंकू, आशा पूर्ति, सुमंत ज्योति सिंकु, विनीत लागुरी, नेहा हेम्ब्रम, पेलोंग पूर्ति, विश्वनाथ बोबोंगा और अन्य ने की. डेबरासाई गांव में बैठक की अध्यक्षता सिद्धेश्वर हेम्ब्रम ने की. जुलडीहा गांव में बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण मुंडा बामिया सिंकु ने की. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के पदयात्रा कार्यक्रम में जमशेदपुर से चलकर पहुंचे पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू और झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक मंडली में सन्नी सिंकु, अमृत मांझी, सुरेश महतो, महेंद्र जामुदा, मंगल सरदार, रेयान सामड, आकाश टुडू, मोतीलाल मुंडा, सावन चतोंबा, डोबरो पूर्ति का जुलडीहा गांव में बच्चियों द्वारा आरती उतारी गई. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-bike-collided-with-divider-on-8-lane-road-driver-killed-2-injured/">धनबाद

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लोहा, कोयला, अभ्रक व अन्य खनिज संसाधन की लूट जारी : सिंकू

बैठक में पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि जिस प्रकार कहा जाता है कि जिस स्थान पर सोना हो तो वहां सांप का वास होता है. सोना चोरी करने की सोच रखने वाले लोगों को सांप को मारना पड़ता है. उसी प्रकार हम आदिवासी जिस जमीन पर रहते हैं वहां नीचे संसाधन की प्रचुरता है. लोहा, कोयला, अभ्रक, बॉक्साइट, सोना, यूरेनियम से लेकर अन्य खनिज संसाधन हैं. सरकार के साथ मिलकर टाटा स्टील लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों को बहुत पहले से हमारे जमीन के नीचे के खान के बारे पता चल गया है. उस खान को ले जाने के लिए भिन्न-भिन्न तरह का हथकंडा अपना रहा है. इसलिए गांव के ग्रामीणों को आंख, कान खोलकर रखना जरूरी है. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु ने टाटा स्टील फाउंडेशन की डेवलपमेंट कॉरिडोर के बारे ग्रामीणों को कहा लगभग टाटा स्टील लिमिटेड नोआमुंडी और टाटा सहित जोड़ा, सुखिंदा और अन्य स्थान पर सौ वर्ष पहले से स्थापित है. लेकिन सौ वर्षों बाद भी जमशेदपुर से कालिंगनगर के बीच कभी डेवलपमेंट कॉरिडोर के तहत कल्याण के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं अपनाया. इसे भी पढ़ें : सुशांत">https://lagatar.in/sister-shweta-rhea-chakraborty-sara-ali-khan-remember-sushant-singh-rajputs-third-death-anniversary/">सुशांत

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अब जब टाटा से कालिंगनगर के बीच जिस रास्ते से वॉल्वो बस में कंपनी अपने इंजीनियर को ले जाने और लाने का काम करती है, उसी रास्ते के 450 गांव में अचानक डेवलपमेंट कॉरिडोर की बात करे तो यह कंपनी का दीर्घकालिक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की परिकल्पना हो ही सकती है. इसलिए 286 किलोमीटर के दूरी के बीच 450 गांव में डेवलपमेंट कॉरिडोर परियोजना के बारे में ग्रामीणों को जागृत करने का काम झारखंड पुनरुत्थान अभियान कर रही है. [wpse_comments_template]
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