Chaibasa (Sukesh kumar) : वैशाख, जेठ और
आषाढ़ के महीनों में गर्मी का जो रौद्र रूप देखने को मिलता है, उससे बचाव का उपाय जनता को
सूझता दिखाई नहीं
देता. मौसम विभाग सिर्फ अलर्ट जारी करके रह जाता
है. उक्त बातें
अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया सिंहभूम लोकसभा प्रभारी रामहरि गोप ने
कही. उन्होंने कहा कि सरकार भीषण गर्मी और लू को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर देना
चाहिए. क्योंकि
बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं के वक्त जैसी सहायता सरकार से मिलती है, लू से मरने वाले लोगों को वह भी नसीब नहीं
होती. सरकार को शायद लू की
फिक्र इसलिए नहीं होती कि इससे प्रभावित होने या मरने वालों में ज्यादातर गरीब ही होते
हैं. असल में कहावत बेअसर हो गई है कि सर्दी का मौसम अमीरों और गर्मी का मौसम गरीबों का, गरीब तो दोनों मौसमों में ताबड़तोड़ मरते
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: सांसद पर कांग्रेस के आरोप गलत, इतने कार्य किए कि गिनवाना संभव नहीं : भाजपा जगह-जगह दिखने वाले धर्मार्थ प्याऊ नदारद हैं
मौसम की मार से बचाने वाला और दानपुण्य के लिए धर्मार्थ प्याऊ और शरबत बांटने की शक्ल में मदद करने वाले सामाजिक तंत्र, जो जीवन में आपाधापी
बढ़ने और पैसे को लेकर लोगों का नजरिया बदलने के साथ तकरीबन विलुप्त हो गए
हैं. एक जमाने में जगह-जगह दिखने वाले धर्मार्थ प्याऊ नदारद
हैं. अब तो प्यास बुझाने वाले हर तंत्र के पीछे बाजार और उसकी ताकतें हैं, जिन्हें दुआओं की नहीं मतलब है तो सिर्फ पैसे
से. जिनके पास पैसा है, वे तो शायद फिर भी गर्मी का मुकाबले जेबें ढीली करके कर
लें. लेकिन जिनके लिए रोज की दिहाड़ी ही जीवन यापन का जरिया है, वे ऐसी तंगहाल सूरत में सीना चीरती प्यास आखिर कैसे बुझाएं और कैसे गर्मी लू के थपेड़ों का सामना
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: नियोजन नीति के खिलाफ छात्रों ने कराया बाजार बंद कोल्हान प्रमंडल में पारा 43 डिग्री के पार
भीषण गर्मी से कोल्हान प्रमंडल का बुरा हाल
है. मौसम विभाग गर्मी की भीषणता के पैमाने पर सबसे हरे-भरे इलाकों में पारा 43 डिग्री के पार जा चुकी
है. पिछले एक सप्ताह से लोगों का घर से निकलना बंद हो चुका
है. जरूरी काम के लिए हीं लोग बाहर निकल रहे
हैं. गांव-कस्बों के मुकाबले शहर की गर्मी ज्यादा तीखी होती
है. शहरों को ज्यादा गरमाने वाली इस समस्या को वैज्ञानिकों ने अर्बन हीट करार दिया है, जो गांव देहात से अलग किस्म की गर्मी पैदा कर रही
है. लेकिन इस गर्मी और लू की एक विडंबना और
है. असल में हर साल सैकड़ों मौतों के बावजूद केंद्र या राज्य सरकार के स्तर से इसका कोई ऐलान नहीं होता कि गर्मी से बचाने के लिए उनकी ओर से क्या उपाय किए जा रहे
हैं. मौसम विभाग तक लू के गंभीर थपेड़ों के बावजूद आसानी से
‘कोड रेड‘ चेतावनी के रूप में रेड अलर्ट घोषित नहीं
करता. ऐसा करें तो सरकार पर गर्मी से बचाने के आपातकालीन उपाय लागू करने का दबाव बनता
है. [wpse_comments_template]
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