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Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम के 86 गांव ब्रेन मलेरिया के रेड जोन में, बिना लक्षण वाले संक्रमितों ने बढ़ाई चिंता

  • मिशन उदय 2.0 में 21,833 लोगों की जांच
  • पूर्वी सिंहभूम में 13 दिनों में 1,731 मरीज संक्रमण की पुष्टि

Chaibasa: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम जिलों में ब्रेन मलेरिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. खासकर पश्चिमी सिंहभूम के 86 गांवों को मलेरिया रेड जोन घोषित किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है. गोइलकेरा और मनोहरपुर प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के रूप में सामने आए हैं, जहां प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (पीएफ) संक्रमण तेजी से फैल रहा है.

 

700 पीएफ संक्रमित मिले

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 6 जुलाई से संचालित मिशन उदय 2.0 के तहत अब तक 21,833 लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है. जांच में 700 लोगों में पीएफ संक्रमण की पुष्टि हुई है. सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इनमें 352 संक्रमित ऐसे मिले, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीज यदि समय पर उपचार नहीं लेते हैं तो उनमें ब्रेन मलेरिया विकसित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

 

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अभियान के दौरान गोइलकेरा प्रखंड में 4,775 लोगों की जांच में 433 संक्रमित मिले, जबकि मनोहरपुर में 5,157 लोगों की जांच के दौरान 103 पीएफ मरीजों की पहचान हुई. मनोहरपुर के छोटानागरा, जामकुंडिया, सलाई, अंकुआ और पंचपहिया उपस्वास्थ्य केंद्रों के अधीन आने वाले 38 गांवों में विशेष स्क्रीनिंग, दवा वितरण और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसे 15 जुलाई तक जारी रखा जाएगा.


सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने बताया कि बड़ी संख्या में बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीज मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग अभियान को और तेज कर दिया है. उन्होंने कहा कि समय पर जांच और दवा शुरू होने से ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर स्थिति से बचाव संभव है.

 

पूर्वी सिंहभूम में भी संक्रमण ने बढ़ाई चिंता

पूर्वी सिंहभूम जिले में भी मलेरिया के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. पिछले 13 दिनों में 77,770 संदिग्ध लोगों की जांच की गई, जिनमें 1,731 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई. इनमें 1,361 मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (पीएफ), 326 प्लाज्मोडियम विवैक्स (पीवी) और 44 मिक्स संक्रमण के मामले शामिल हैं. यानी कुल संक्रमितों में करीब 73 प्रतिशत मरीज पीएफ श्रेणी के हैं, जिसे ब्रेन मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है.

 

सात मौतों से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में अब तक ब्रेन मलेरिया से सात लोगों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, ठंड लगना, कमजोरी या अन्य लक्षण महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की जांच कराएं. साथ ही मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें, घर और आसपास जलजमाव न होने दें तथा स्वास्थ्य विभाग की जांच और दवा वितरण टीमों का सहयोग करें. समय पर जांच और उपचार ही ब्रेन मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है.

 

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