Shambhu Kumar
Chaibasa News: मुनु दोसतुर हो समाज महासभा की ओर से मंगलवार को छह सूत्री मांगों को लेकर चाईबासा स्थित एसडीओ कार्यालय के बाहर एक दिवसीय धरना दिया गया. धरना के बाद महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम मांग पत्र सौंपा.
मांग पत्र में अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति एवं अन्य समुदायों की रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई.
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महासभा ने कहा कि धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को ग्राम सभा में रूढ़िजन्य विधि के अनुसार सहमति प्राप्त करनी चाहिए तथा इसकी जानकारी उपायुक्त को देनी चाहिए. महासभा ने भाषा, संस्कृति और धर्म के संरक्षण के लिए अलग धर्म कोड लागू करने, अनुसूचित क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों में हो भाषा एवं वारंग चिति लिपि के प्रयोग तथा हो भाषा और लिपि जानने वाले कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों की नियुक्ति की मांग की.
सभी प्राथमिक विद्यालयों में हो भाषा और वारंग चिति लिपि के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई. इसके अलावा नाबालिग आदिवासी बालिकाओं एवं छात्र-छात्राओं के कचहरी तालाब और रूंगटा गार्डन में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग रखी गई. महासभा ने सीएनटी एक्ट एवं विल्किंसन रूल्स को सख्ती से लागू कर गैर-आदिवासियों के कब्जे में गई आदिवासी जमीन वापस कराने की मांग भी की.
धरना में महासभा के अध्यक्ष कृष्णा सिंकू, उपाध्यक्ष सुनील गागराई, चुमरु पिंगुवा, नरसिंह पुरती, महासचिव गोविंद बिरूली, सचिव मदन सिंकू, दीपक सोय, अमन हासदा, कोषाध्यक्ष छाया बोइपाई, डीबर देवगन और जॉन मिरन मुंडा समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे.
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