- - ग्रामीणों ने पूजा स्थल(देशाउली) की सुरक्षा एवं संरक्षण का लिया संकल्प
Sukesh kumar
Chaibasa: मझगांव प्रखंड अंतर्गत पांडुकी गांव में ‘हो समाज’ की आस्था एवं धार्मिक विश्वास के प्रमुख केंद्र देशाउली (बोंगा-बुरु पूजा स्थल) में ग्राम के दिउरी एवं सहयोगी दिउरियों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाज एवं धार्मिक विधि-विधान के अनुसार जाते-परचि (शुद्धिकरण) का आयोजन किया गया. इस अवसर पर गांव के मानकी, मुंडा, दिउरी, बुजुर्ग, युवा एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. सभी ने देशाउली की पवित्रता, सुरक्षा एवं संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया तथा धार्मिक परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने का निर्णय लिया.

शुद्धिकरण अनुष्ठान के उपरांत आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि देशाउली हो समाज की आस्था, परंपरा, संस्कृति एवं पूर्वजों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है. इसकी रक्षा एवं संरक्षण करना प्रत्येक समाजजन का नैतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दायित्व है.
इसे भी पढ़ें:
उन्होंने कहा कि समाज की धार्मिक पहचान से जुड़े ऐसे पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी परंपराओं को सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
बैठक में ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि पिछले कुछ समय से बाहरी लोगों द्वारा देशाउली परिसर में अनावश्यक आवाजाही, अभद्र व्यवहार तथा शराब, सिगरेट एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं. आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ पूजा स्थल की पवित्रता एवं सांस्कृतिक गरिमा को भी प्रभावित करती हैं.
उन्होंने ऐसे कृत्यों पर तत्काल रोक लगाने और सभी लोगों से धार्मिक स्थलों का सम्मान करने की अपील की. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देशाउली की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए पूरे गांव के प्रत्येक परिवार द्वारा देशाउली के नाम एक-एक बांस समर्पित किया जाएगा.
ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से पूजा स्थल की बांस से घेराबंदी की गई. ताकि अनधिकृत प्रवेश एवं असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. साथ ही देशाउली परिसर की नियमित साफ-सफाई, देखरेख एवं संरक्षण सामूहिक रूप से किए जाने का भी निर्णय लिया गया.
ग्रामीणों ने कहा कि देशाउली केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि हो समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता एवं पूर्वजों की आस्था का जीवंत प्रतीक है. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि इस पवित्र स्थल की गरिमा सदैव अक्षुण्ण बनी रहे
.
इस अवसर पर पांडुकी ग्राम के दिउरी जाम्बिरा बिरुवा उर्फ भोले, सहयोगी दिउरियों, मानकी-मुंडा संघ के केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पूर्व अध्यक्ष भूषण पाट पिंगुवा, महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम, प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरुवा, जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, नंदलाल पिंगुवा, मनीष बिरुवा, प्रदीप बिरुवा, मुंडा बिरुवा, हरीश बिरुवा सहित पांडुकी गांव के मानकी, मुंडा, दिउरी, युवा एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment