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Chaibasa News : ईसाई धर्म छोड़ सरना धर्म में वापस लौटा परिवार

Chaibasa News : सामाजिक कार्यकर्ता टुपरा पूर्ति ने बताया कि करीब चार महीने पहले उनका परिवार बीमारी से परेशान था. पूजा-पाठ कराने के बावजूद राहत नहीं मिल रही थी. इसकी वजह से परिवार निराश और उदास में जीवन व्यापन कर रहे थे. बीमारी ठीक होने की उम्मीद में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था.
 
सरना

Chaibasa News : नोवामुंडी प्रखंड के पेटेएता गांव के बुरुसाई टोला में टुपरा पूर्ति (35) ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ आदिवासी हो समाज की मूल संस्कृति, परंपरा और सरना धर्म में वापसी की. इसके लिए गांव के पाहन सुखराम पूर्ति ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ शुद्धिकरण अनुष्ठान संपन्न कराया. इस मौके पर ग्रामीणों और आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों मौजूद थे.

 

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बीमारी से परेशान होकर अपनाया था ईसाई धर्म

सामाजिक कार्यकर्ता टुपरा पूर्ति ने बताया कि करीब चार महीने पहले उनका परिवार बीमारी से परेशान था. पूजा-पाठ कराने के बावजूद राहत नहीं मिल रही थी. इसकी वजह से परिवार निराश और उदास में जीवन व्यापन कर रहे थे. बीमारी ठीक होने की उम्मीद में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. 

 

आदिवासी समाज की मूल संस्कृति सरना धर्म से जुड़ा- गब्बरसिंह हेम्ब्रम

आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने बताया कि सभी लोगों ने अपने मूल धर्म में वापस आने के फैसले पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है.

 

डायन-प्रथा, ओझा-तंत्र और झाड़-फूंक जैसी कुरीतियों के कारण लोग परेशान होते हैं. लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती है. कई परिवार मुश्किल परिस्थितियों में पड़ जाते हैं. ऐसे में कुछ लोग मजबूरी में धर्म परिवर्तन की ओर बढ़ते हैं और अपनी पारंपरिक संस्कृति से दूर हो जाते हैं. 

 

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान और मार्ग दर्शन के लिए गांव में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे है. आदिवासी समाज की मूल संस्कृति सरना धर्म से जुड़ा है. इस परंपरा को सरंरक्षण और परंपरा को बचाने के लिए सभी युवा पीढ़ी को आगे आना होगा. गांव में गांव शिक्षा का अलख जगाना होगा. आदिवासियों के हक अधिकार के प्रति हमेशा सजग रहने की जरूरत है.

 

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, उपाध्यक्ष पुतकर लागुरी, सदस्य राजेन्द्र हेम्ब्रम, ग्रामीण मुंडा बिरसा पूर्ति, लम्पाहेस्सा के मुंडा विभीषण लागुरी, डाकुवा कुंदरा अंगरिया, गंगाराम लागुरी, बिरसा लागुरी, सतारी पूर्ति, डुरसु पूर्ति, सुबोध पूर्ति, सीनू पूर्ति, तुरी पूर्ति, लादु पूर्ति, दिनेश पूर्ति, सोमा पूर्ति, लाघोराम पूर्ति, मानी पूर्ति, पालो तिरिया, सुर्यमानी पूर्ति, बसंती पूर्ति, मनीता पूर्ति और सोना पूर्ति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

 

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