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बच्चों की शादी भी नहीं कर पा रहे हैं : विवेक जोंको
[caption id="attachment_401468" align="aligncenter" width="780"]alt="" width="780" height="1040" /> चालियामा गांव निवासी विवेक जोंको.[/caption] आदिवासी परिवार के एक सदस्य विवेक जोंको ने कहा कि रुंगटा ग्रुप के सुरक्षाकर्मी आवागमन करने पर जांच करते हैं. अपने घर आने में भी अब जांच का सामना करना पड़ता है. यह सिलसिला पिछले एक साल से चल रहा है. कोई बाहर से मेहमान आता है तो उसे आने की इजाजत तक नहीं मिलती है. अगर आ भी जाएं तो उसकी पूरी रिपोर्ट रूंगटा ग्रुप को देनी होती है. ऐसे में यहां के आदिवासी अपने बच्चों का शादी-ब्याह तक नहीं कर पा रहे हैं. किसी तरह का सामाजिक काम नहीं हो पा रहा है. शासन और प्रशासन को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है, लेकिन किसी तरह का समाधान नहीं हो पाया है. यदि हमें न्याय नहीं मिलेगा तो हम नक्सली बनकर हिंसा की ओर जाने को मजबूर होंगे. इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. इसे भी पढ़ें : BREAKING">https://lagatar.in/heavy-police-force-stopped-the-media-by-taking-to-the-road-near-birda-village-of-khunti/">BREAKING
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आजाद भारत में गुलामों की जिंदगी जी रहे
[caption id="attachment_401488" align="aligncenter" width="1040"]alt="" width="1040" height="780" /> बाउंड्री वॉल के अंदर कैदी की जिंदगी जी रहे आदिवासी.[/caption] विवेक जोंको ने कहा कि आजाद भारत में गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं. आजादी के 75 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अब भी आदिवासी आजाद नहीं हैं. आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. स्थानीय विधायक और सांसद को भी कई बार रैयती जमीन पर रहने और सड़क को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कराने का आग्रह किया गया है, लेकिन सभी पूंजीपतियों की ही बात सुनते हैं. आदिवासियों को कोई सहारा नहीं मिल रहा है. गांव में हम लोग कैसा महसूस कर रहे हैं यह सिर्फ हम ही जानते है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-single-speech-competition-organized-in-kashidih-high-school/">जमशेदपुर
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न जनप्रतिनिधि सुन रहे हैं न ही पदाधिकारी
[caption id="attachment_401486" align="aligncenter" width="720"]alt="" width="720" height="385" /> जनप्रतिनिधियों के प्रति ग्रामीणों में आक्रोश.[/caption] चालियामा गांव के आदिवासियों की समस्या न तो जनप्रतिनिधि सुन रहे हैं न ही शासन के पदाधिकारी सुन रहे हैं. मालूम हो कि स्थानीय विधायक सह कैबिनेट मंत्री चंपई सोरेन व सांसद गीता कोड़ा से 11 परिवार के कुल 42 सदस्यों ने कई बार न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन किसी तरह का समाधान नहीं हुआ. बदले में उन्हें अपनी जगह से ही हटने की धमकी दी जा रही है. इसे भी पढ़ें : शादी">https://lagatar.in/after-marriage-these-bollywood-actresses-gave-importance-to-the-family-said-goodbye-to-bollywood/">शादी
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नक्शा में बनी सड़क को भी रूंगटा ने घेरा, खेती नहीं कर पा रहे हैं
[caption id="attachment_401490" align="aligncenter" width="1280"]alt="" width="1280" height="960" /> नक्शा में बनी सड़क.[/caption] नक्शा में एक सड़क तैयार किया गया है जो रूंगटा ने चारों तरफ जाली से घेर दिया है. अंदर 11 परिवार के किसी भी सदस्य को आने जाने में रोक तो नहीं है, लेकिन अंदर बाहर जाने के लिए सुरक्षाकर्मी को जानकारी देनी पड़ती है. अगर अंदर के किसी भी परिवार के रिश्तेदार बाहर से आते हैं तो उनका सारा डिटेल्स देना पड़ता है. यहां तक की सुरक्षाकर्मी के अलावा रुंगटा ग्रुप के उच्च पदाधिकारी से बात करनी पड़ती है. उसके बाद ही उसे अंदर जाने दिया जाता है. रुंगटा ग्रुप की बाउंड्री के अंदर परिवार की एक आदीवासी महिला सदस्य नूतन जोंको ने कहा कि रिश्तेदार अब तो आना ही छोड़ दिए हैं. इतनी सुरक्षा के बीच घुसना पड़ता है. अब तो हमें डर सा लगता है. 2017 के बाद से खेती भी नहीं करने दिया जा रहा है. जानवर भी नहीं रख पा रहे हैं. हमारी संस्कृति परंपरा एक रीति रिवाज का भी हनन हो रहा है, जबकि अंदर हम लोगों की 10 एकड़ से अधिक जमीन है. किसी में भी खेती नहीं कर पाते हैं. हम लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. एक जेल सा महसूस कर रहे हैं. सरकार से मांग है कि सड़क को रुंगटा से अतिक्रमण मुक्त किया जाए. नया घर तक हम लोग बना नहीं पा रहे हैं, अंदर सामान तक लाने नहीं दिया जा रहा है. अपनी जमीन में भी हमें जगह नहीं मिल रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/chaibasa-farewell-given-to-psychology-students-in-workers-college/">जमशेदपुर
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आदिवासियों ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से लगाई आजादी की गुहार
[caption id="attachment_401501" align="aligncenter" width="1040"]alt="" width="1040" height="780" /> गांव की सड़क को घेरकर बनाया गया गेट.[/caption] रुंगटा ग्रुप के बाउंड्री अंदर निवास करने वाले 11 आदिवासी परिवार के सदस्यों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आजादी की मांग की है. इन आदिवासी परिवारों का मानना है कि अभी हम लोग आजाद नहीं हैं. किसी दूसरे के मुताबिक हमारी जिंदगी चल रही है. हम अपने मुताबिक किसी तरह का काम नहीं कर पा रहे हैं. हमारे घर कोई रिश्तेदार भी नहीं आ पा रहे हैं. न ही हमलोग अपने मुताबिक कहीं बाहर निकल पा रहे हैं. हम लोग एक जेल में कैद होने जैसा महसूस कर रहे हैं. प्रधानमंत्री से आग्रह है कि हमें न्याय दिया जाए. आदिवासी परिवार के सदस्यों ने कहा कि पहली बार आदिवासी समाज से द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनी हैं. हमें उनसे आशा है कि वे हमें न्याय दिलाएं. अन्यथा हम लोग नक्सली तक बनने को तैयार हैं. जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी. इसे भी पढ़ें : किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-the-central-government-is-trying-to-destabilize-the-non-bjp-ruled-state-governments-mangal-singh-bobonga/">किरीबुरू
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तंग आकर दो आदिवासी परिवार ने छोड़ा घर
[caption id="attachment_401510" align="aligncenter" width="523"]alt="" width="523" height="711" /> गेट तोड़ने के सीओ के आदेश की कॉपी.[/caption] लगातार प्रताड़ित होने के पश्चात आखिरकार दो आदिवासी परिवार अपनी जमीन छोड़कर बाहर रहने को विवश हो गए. आने जाने पर असुविधा और अपने मुताबिक नहीं जीने देने की वजह से दो परिवार बेलमती जोंको और मालवती जोंको अपना घर छोड़कर गांव से बाहर रहने को मजबूर हैं. अब बाकी परिवार डरे हुए हैं कि कहीं उन्हें कुछ हो ना जाए. अब यदि शासन और प्रशासन उन्हें न्याय नहीं देगा तो आने वाले दिनों में कुछ भी होने की बात कही जा रही है. इसे भी पढ़ें : BREAKING">https://lagatar.in/breaking-upa-mlas-will-return-from-khunti-this-evening-only-then-meeting-will-be-held-in-cm-residence-avinash-pandey-will-also-be-involved/">BREAKING
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क्या है पूरा मामला जानें
रुंगटा ग्रुप एक प्लांट चालियामा गांव में पिछले कई वर्षों से चला रहा है. प्लांट के सामने कुछ आदिवासियों की जमीन है. वहां वे लोग निवास करते हैं और खेती भी करते हैं. लेकिन रुंगटा ग्रुप की ओर से उनके घर और खेत को चारों तरफ से घेर लिया गया है. नक्शा में एक सड़क भी दिया गया है. लेकिन सड़क का भी अतिक्रमण कर लिया गया है. इसके कारण अंदर 11 परिवार निवास करते हैं. अब उन परिवारों को आने जाने में काफी कठिनाई होती है. 2017 से आदिवासी परिवार की ओर से खेती नहीं की जा रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-corona-earned-the-sculptors-of-chaupat-said-we-are-left-behind-by-five-years/">जमशेदपुर: कोरोना ने चौपट की मूर्तिकारों की कमाई, कहा- पांच साल पीछे छूट गए हम

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