Chaibasa (Sukesh Kumar) : कोल्हान में सीएनटी एक्ट 1908 के तहत रिकॉर्ड ऑफ राइट में प्रदत हुकुकनामा के अनुसार मानकी मुंडा को प्राप्त अधिकार और जिम्मेदारी को बचाए रखने के लिए लड़ाई लड़ना जरूरी है. यह बातें टोंटो प्रखंड लिसिया गांव की बैठक में सोमवार को ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पूर्व मुखिया कोलंबस हांसदा ने कही. उन्होंने कहा कि कोल्हान के नेतागण कोल्हान के जनता से वोट तो ले लेते हैं. लेकिन कोल्हान की पारंपरिक, सामाजिक अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सदन में कोई बात नहीं करता. इसे भी पढ़ें : बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-father-son-thrashed-alleging-theft-severe-head-injuries/">बोकारो
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शहीदों के बलिदानों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कोई पहल नहीं करता
नेतागण कोल्हान के शहीदों के याद में बड़ी बात बोल देते हैं. लेकिन शहीदों की बलिदानों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कोई पहल नहीं करता. कोल्हान में पदस्थापित ऑफिसर का भी रवैया मानकी मुंडा और ग्रामीणों के प्रति सकारात्मक नहीं रहता है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण कोल्हान अधीक्षक के पद को मृतप्राय बना देना है. जबकि कोल्हान अधीक्षक को कोल्हान में उपायुक्त के बाद सबसे अधिक अधिकार प्रदान की गई है. लेकिन व्यवहारिकता में उल्टा है. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-by-the-end-of-this-year-40-health-sub-centers-will-be-converted-into-wellness-centers/">गिरिडीह: इस वर्ष के अंत तक 40 स्वास्थ्य उप केंद्र वेलनेस सेंटर में होंगे तब्दील
गैर मजरूआ परती जमीन पर मानकी मुंडा का अधिकार होता है
उसी तरह से विल्किलसन रूल के प्रावधान के अनुसार कोल्हान कोर्ट में सीड्यूल एरिया एक्ट के तहत मानकी मुंडा के प्रतिवेदन के आलोक में न्याय की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है और कोल्हान में गैर मजरूआ परती जमीन पर अधिकार मानकी मुंडा का होता है. लेकिन कोल्हान की गैर मजरूआ परती जमीन को भूमि बैंक में जमा कर दिया गया. तब भी नेतागण चुप हैं. अब कोल्हान के मानकी मुंडा को हुकुकनमा में प्राप्त अधिकार को बचाने के लिए एक ही उपाय है जन आंदोलन. अब कोल्हान की जनता पहले की तरह जन आंदोलन करने के लिए तैयार हो जाएं. तब ही कोल्हान की भू-स्वामित्व यानी जल, जंगल, जमीन बचेगा.
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