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चाईबासा : स्थानीय नीति का मामला नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया- पूर्व सांसद

Chaibasa (Sukesh Kumar) : राज्य के मुख्यमंत्री चाईबासा में किसे जोहार करने के लिए आ रहें है? देश के किसी भी राज्य में स्थानीय नीति का मामला नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है. यह सिर्फ जुमला है. खतियान आधारित स्थानीय नीति को लटकाने के लिए मुख्यमंत्री ने विधानसभा से विधेयक पारित कर केंद्र के हाथ में भेज दिया है. उनको पता है कि केंद्र सरकार झारखंड की स्थानीय नीति पर गंभीर नहीं है. यह बातें नवगठित गैर राजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरूत्थान अभियान के प्रेस वार्ता में सोमवार को पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहीं. चित्रसेन सिंकू ने कहा कि जिला में डीएमएफटी के हजार करोड़ रुपये को जिला के समग्र विकास में खर्च किया जा सकता है, लेकिन इसपर न मुख्यमंत्री और न जिला के आला पदाधिकारी गंभीर हैं. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-gayatri-shiksha-niketans-vanbhoj-cum-family-get-together-organized/">आदित्यपुर

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आदिवासी उप योजना के रुपये खर्च नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण

झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सन्नी सिंकू ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला में आदिवासी उप योजना के रुपये को खर्च नहीं करना दुर्भाग्य की बात है. जबकि आदिवासी उपयोजना की जो राशि केंद्र से प्राप्त हुई है सौ फीसदी सब्सिडी है. 2020 से 2022 तक में 200 करोड़ रुपये में से एक फूटी कौड़ी नहीं खर्च कर पाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जिला के उपायुक्त और नोडल पदाधिकारी जिम्मेदार हैं. उस राशि को खर्च करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और जिला प्रशासन की है. जिला के एमएलए, एमपी चुने हुए जन प्रतिनिधि भी कम जिम्मेवार नहीं हैं. साथ ही डीएमएफटी की राशि खर्च करने के लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याणकारी योजना के तहत साफ निर्देश दिया गया है कि खदान से विस्थापित होने वाले ग्रामीणों का पुनर्वासन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए राशि प्राथमिकता से खर्च करना है. पर जैंतगढ़, नोवामुंडी भाया हाट गम्हरिया, चाईबासा से आने वाले भारी वाहन से सड़कें टूट गई हैं. इसे भी पढ़ें : ICC">https://lagatar.in/iccs-best-2022-t20-playing-xi-virat-kohli-suryakumar-yadav-and-hardik-pandya-included/">ICC

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गांव भी हो रहे धूल-धूसरित

इन सड़कों के नहीं बनने की वजह से कई किलोमीटर दूर के गांव भी धूल धूसरित हो रहे हैं. ग्रामीण कई तरह की बीमारियों की चपेट में ग्रामीण असमय ही मर रहे हैं. पर जिला प्रशासन मौन है. और यही जिला प्रशासन की प्रशासनिक कार्य संस्कृति है. पर अब झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सदस्य सामाजिक संगठन बनाकर प्रशासन के खिलाफ जन आंदोलन करने के लिए संकल्पित हैं. [wpse_comments_template]

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