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JPSC में अध्यक्ष बदलते रहे, पर परीक्षाओं के विवाद नहीं थमे

Ranchi News :  झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में पिछले करीब 13 वर्षों के दौरान अध्यक्ष बदलते रहे, लेकिन परीक्षाओं से जुड़े विवाद और लंबित प्रक्रियाएं लगातार चुनौती बनी रहीं. वर्ष 2013 से अब तक अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में पांचवीं, छठी, सातवीं से 10वीं और 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (CCE) की प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं. वहीं, मौजूदा दौर में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और परीक्षा संचालन से जुड़ी संविदा एजेंसी के चयन को लेकर उठे सवालों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर बहस छेड़ दी है.
 
  • 2013 से अब तक अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में सिविल सेवा समेत कई परीक्षाओं की प्रक्रिया आगे बढ़ी
  • लेकिन लंबित नियुक्तियां, परीक्षा संचालन और कथित अनियमितताओं के आरोप लगातार चुनौती बने रहे

Ranchi News :  झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में पिछले करीब 13 वर्षों के दौरान अध्यक्ष बदलते रहे, लेकिन परीक्षाओं से जुड़े विवाद और लंबित प्रक्रियाएं लगातार चुनौती बनी रहीं. वर्ष 2013 से अब तक अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में पांचवीं, छठी, सातवीं से 10वीं और 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (CCE) की प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं. वहीं, मौजूदा दौर में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और परीक्षा संचालन से जुड़ी संविदा एजेंसी के चयन को लेकर उठे सवालों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर बहस छेड़ दी है. 

 

JPSC के इतिहास में कई ऐसी परीक्षाएं भी रहीं, जिनकी प्रक्रिया एक अध्यक्ष के कार्यकाल में शुरू हुई और दूसरे के कार्यकाल में पूरी हुई. कभी वर्षों से लंबित परीक्षाओं को पूरा कराना उपलब्धि रहा, तो कभी परीक्षा संचालन, परिणाम और कथित गड़बड़ियों के आरोपों ने आयोग को घेरा.

 

देवाशीष गुप्ता : 5वीं सिविल सेवा परीक्षा रही प्रमुख

जुलाई 2013 से फरवरी 2015 तक JPSC के अध्यक्ष रहे पूर्व आईएएस अधिकारी देवाशीष गुप्ता के कार्यकाल में पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया प्रमुख रही.  इस दौरान विभागीय और वन सेवा से जुड़ी कुछ परीक्षाओं की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ीं.

 

डॉ. डीके श्रीवास्तव : लंबित परीक्षाओं को आगे बढ़ाने पर जोर

फरवरी 2015 से दिसंबर 2016 तक अध्यक्ष रहे डॉ. डीके श्रीवास्तव के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना था. उनके कार्यकाल में मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार से जुड़ी प्रक्रियाएं हुईं. छठी सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया भी इसी अवधि में आगे बढ़ी. इसके अलावा प्रोफेसर, शिक्षक समेत विभिन्न पदों पर नियुक्ति से संबंधित प्रक्रियाएं भी आयोग के एजेंडे में रहीं.

 

के. विद्यासागर : छठी सिविल सेवा पर फोकस

के. विद्यासागर जनवरी 2017 से 13 नवंबर 2018 तक JPSC के अध्यक्ष रहे. करीब 22 महीने के कार्यकाल में छठी सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना प्रमुख कार्यों में रहा. इसके साथ ही बैकलॉग और विभिन्न विभागों से संबंधित परीक्षाओं की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया.


सुधीर कुमार त्रिपाठी : नई बड़ी संयुक्त परीक्षा पूरी नहीं हो सकी 

सुधीर कुमार त्रिपाठी 1 अप्रैल 2019 से 26 सितंबर 2020 तक JPSC के अध्यक्ष रहे. करीब डेढ़ वर्ष के इस कार्यकाल में प्रशासनिक कामकाज, लंबित परिणाम और आगामी परीक्षाओं की रूपरेखा पर काम हुआ. इस अवधि में कोई नई बड़ी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा पूरी नहीं हो सकी. बाद में उन्हें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) का अध्यक्ष बनाया गया.

 

अमिताभ चौधरी : 7वीं से 10वीं CCE का रिकॉर्ड निष्पादन

अक्टूबर 2020 से जुलाई 2022 तक JPSC के अध्यक्ष रहे अमिताभ चौधरी के कार्यकाल में 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सबसे अधिक चर्चा में रही. लंबे समय से लंबित इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया 251 दिनों में पूरी करने और परिणाम जारी करने का दावा आयोग की ओर से किया गया. उनके कार्यकाल में वर्षों से लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को गति देने का भी प्रयास हुआ.

 

डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा : 11वीं से 13वीं CCE की मुख्य परीक्षा

सितंबर 2022 से 22 अगस्त 2024 तक JPSC की अध्यक्ष रहीं डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा के कार्यकाल में 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया प्रमुख रही. जून 2024 में इसकी मुख्य परीक्षा आयोजित की गयी. हालांकि उनके पूरे कार्यकाल में आयोग द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की कुल संख्या का कोई एक स्पष्ट और समेकित आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

 

एल. ख्यांग्ते : 14वीं CCE के दौरान विवाद और इस्तीफा

एल. खियांग्ते को 27 फरवरी 2025 को JPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. उनके कार्यकाल में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सबसे प्रमुख रही. प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और परीक्षा संचालन के लिए संविदा एजेंसी के चयन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आये. 

 

विवाद बढ़ने के बाद ख्यांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया और परीक्षा संचालन से जुड़े मामलों की जांच तेज हुई. 10 अगस्त 2026 को CID की कार्रवाई में भी उनका नाम सामने आया. 14वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत आगे की प्रक्रिया पर भी विवाद का असर पड़ा.

 

परीक्षा संचालन की एजेंसी भी सवालों के घेरे में

मौजूदा विवाद में परीक्षा संचालन के लिए इस्तेमाल की गयी संविदा एजेंसी TDPL की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एजेंसी के चयन, OMR और परीक्षा संचालन की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने JPSC की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है. इसी बीच झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं के बीच दर्जनों भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. इससे JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गयी है.

 

बॉयलर इंस्पेक्टर परीक्षा भी विवादों से है घिरी

JPSC की विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत बॉयलर इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा भी मौजूदा विवादों से घिरी है. यह परीक्षा सितंबर 2026 में प्रस्तावित थी. OMR और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्था की जांच के बीच इसके आयोजन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है और परीक्षा रद्द होने की स्थिति बनी है.

 

अध्यक्ष बदलते रहे, चुनौती बनी रही

JPSC के पिछले करीब 13 वर्षों के सफर पर नजर डालें तो अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में अलग-अलग परीक्षाएं और प्रक्रियाएं प्रमुख रहीं. किसी दौर में वर्षों से लंबित परीक्षाओं को पूरा कराना सबसे बड़ी चुनौती रहा, तो किसी कार्यकाल में तेजी से परीक्षा और परिणाम जारी करना उपलब्धि के रूप में सामने आया. 

 

हालांकि, मौजूदा दौर में परीक्षा संचालन, आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन और कथित अनियमितताओं के आरोपों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबसे बड़ी चुनौती केवल लंबित परीक्षाओं को पूरा कराना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना भी है. 

 

 

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