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Chandil : कोल्हान की पहाड़ियों में कमल खिलाने को बेताब है भाजपा, बीते चुनाव में हुआ था सूपड़ा साफ

Chandil (Dilip Kumar): कोल्हान की पहाड़ियों में भाजपा एक बार फिर कमल खिलाने को बेताब दिख रही है. आसन्न विधानसभा चुनाव में अपनी खोयी प्रतिष्ठा एक बार फिर से हासिल करने के लिए भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. इस बार भाजपा कोई कोर-कसर बाकि नहीं रखना चाह रहा है. चुनाव प्रचार अभियान शुरू होते ही भाजपा सीधे अपने सुपर स्टार प्रचारकों को ही मैदान में उतार रही है. यानि भाजपा ने लीग मैच नहीं खेलकर सीधे फाइनल मैच ही खेलना शुरू कर दिया है. रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के बाद सोमवार को प्रधानमंत्री का कार्यक्रम कोल्हान में आयोजित कर भाजपा प्रतिद्वंदियों पर भारी रहना चाह रही है. गृहमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यकर्ताओं में शुरू से ही ऐसा जोश भरना चाह रहे है, जिससे चुनाव तक कार्यकर्ता उर्जावान रहकर उम्मीदवारों को जिताने का काम कर सके. इसके अलावा कोल्हान में किला फतह करने के लिए केंद्रीय मंत्री व अन्य केंद्रीय व प्रदेश स्तरीय नेता जगह-जगह छोटे-छोटे कार्यक्रम कर लोगों के बीच अपनी बातों को रख रहे हैं. मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए भाजपा अब कोई कसर बाकि नहीं रखना चाह रही है.

14-0 से आउट हुई थी भाजपा

कोल्हान के 14 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुए चुनाव में भाजपा का हाथ खाली रह गया था. एक भी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा चुनाव नहीं जीत पाई थी. मुख्यमंत्री रहते रघुवर दास जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा से बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े सरयू राय से पराजित हुए थे. कोल्हान के 14 विस क्षेत्र में जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय के चुनाव जीतने के अलावा अन्य सभी 13 सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार विजयी रहे थे. इनमें दो सीट जमशेदपुर पश्चिम और जगन्नाथपुर सीट से कांग्रेस और अन्य सभी 11 सीटों पर झामुमो विजयी रहा था.

अब इंडिया गठबंधन के सामने अपना साम्राज्य बचाए रखने की चुनौती

अब इंडिया गठबंधन के सामने अपना साम्राज्य को बचाए रखने की चुनौती है.अब परिस्थितियां बदल गई हैं. झामुमो के कद्​दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और कांग्रेस पार्टी की चाईबासा की पूर्व सांसद गीता कोड़ा अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो चुकी हैं. ऐसे में इंडिया गठबंधन को अपना किला बचाए रखने में परेशानी हो सकती है. वहीं भाजपा से भी कुछ नेता पार्टी छोड़कर झामुमो में शामिल हुए हैं, जिसका लाभ उसे मिलेगा.

कितना कारगर रहेगा गठबंधन

विधानसभा चुनाव परिणाम को भाजपा-आजसू पार्टी का एनडीए गठबंधन प्रभावित कर सकता है. जानकारों को कहना है कि एनडीए गठबंधन धरातल पर ईमानदारी पूर्वक काम करे तो निश्चित तौर पर चुनाव परिणाम बदलेंगे. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे. जिसका नतीजा था कि कोल्हान में दोनों दलों को एक भी सीट नहीं मिली थी. आसन्न विधानसभा चुनाव में दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों ही दलों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं बागी उम्मीदवार भी इनके राह में रोड़ा बन सकते हैं. बगावत करने वाले अपनी पुरानी पार्टी के संगठन में सेंधमारी गठबंधन पर असर डाल सकता है. बहरहाल, एनडीए का कहना है कि इस चुनाव में फल और फूल की ही बारी है. वहीं इंडिया गठबंधन का कहना है कि पहाड़-पर्वत में कमल नहीं खिला करते. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/income-of-jharkhand-assembly-election-candidates-meera-munda-ajay-kumar-and-shashibhushan-mehta-is-in-crores/">झारखंड

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