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चांडिल : मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत होती है पूरी

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  • मां खेलाई चंडी परिसर में 16 जनवरी को जुटेंगे आस्था रखने वाले श्रद्धालु
Chandil (Dilip Kumar) : यहां माता का ना कोई भव्य मंदिर, ना देवी की आकर्षक मूर्ति. मान्यता है कि इसके बाद भी यहां माता के नाम से सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है. यहां माता पर आस्था रखने वाले लोगों के लिए मां का आशीर्वाद सदा बना रहता है. ये स्थान है चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत सामानपुर पंचायत के अधीन बामनी में. दलमा पर्वत श्रृंखला से जुड़े छोटे-बड़े पर्वतों की तराई पर यहां वर्षों से मेला लगता आ रहा है. यहां मां चंडी (दुर्गा) की पूजा साल पेड़ के नीचे एक शिला में की जाती है. मकर संक्रांति के एक दिन बाद पहला माघ यानि आखाइन यात्रा के दिन लगने वाले खेलाई चंडी मेला में झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा व अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसे भी पढ़ें : उत्तर">https://lagatar.in/haze-wreaks-havoc-in-north-india-many-flights-and-trains-delayed-passenger-punches-pilot-after-flight-gets-delayed-at-delhi-airport/">उत्तर

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दी जाती है बलि

स्थानीय ग्रामीण बताते हें कि आस्था से बंधे दूर-दराज के श्रद्धालु मां खेलाई चंडी की दरबार में पहुंचते हैं. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु सामने स्थित तालाब में नहाकर दंडी देते हुए पूजा स्थान तक पहुंचते हैं. पजा-अर्चना के बाद मां से मन्नते मांगते हैं. मन्नत पूरा होने पर श्रद्धालु प्रसाद के साथ कबूतर, बकरा आदि का बलि चढ़ते हैं. यहां माता की पूजा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला के पुहाड़ा गांव के पुरोहित द्वारा किया जाता है. पीढ़ी दर पीढ़ी उसी खानदान के पंडित द्वारा पूजा-अर्चना किया जाता है. यहां बामनी गांव के लाया द्वारा बलि दी जाती है. मां खेलाईचंडी के नाम से प्रचलित मां दुर्गा की पूजा प्राचीनकाल से वर्ष में एक ही बार आखाइन यात्रा के दिन यानि पहला माघ को होता आ रहा है. इस दिन यहां भव्य व विशाल मेला भी लगता है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-minor-raped-murdered-and-buried-body-in-kashiapecha-village/">किरीबुरु

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तैयारियों को दी जा रही अंतिम रूप

पहला माघ को यानि 16 जनवरी आखाइन यात्रा के दिन लगने वाले मेला की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. मेला परिसर की साफ-सफाई का काम पूरा कर लिया गया हे. दुकान लगाने के लिए जमीन चिन्हित कर दिया गया है. तालाब से पूजा स्थान पर रास्ते को दुरुस्त कर दिया गया है. मेला आयोजन समिति के सदस्य किसी भी श्रद्धालु को मेला में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसका ध्यान रखकर काम कर रहे हैं. मेला परिसर में सुबह से शाम तक भक्तों का भीड़ लगी रहती है. मेला में दूर-दराज से टुसू, चौड़ल भी पहुंचता है, जिसे मेला आयोजन समिति द्वारा सम्मानित किया जाता है. [wpse_comments_template]

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