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चांडिल : रेल ट्रैक से हटाने के बाद आदिवासी सेंगेल अभियान ने दो घंटे एनएच 32 किया जाम

Chandil (Dilip Kumar)आदिवासी सेंगल अभियान के सदस्य ट्रैक पर बैनर लगा कर बैठ गए. इसके कारण नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, बड़काखाना, हाटिया यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ. रेलवे अधिकारी और रेल पुलिस के साथ लंबी वार्ता के बाद आंदोलनकारी ट्रैक से हटे. उस वक्त आंदोलनकारियों की संख्या काफी कम थी. इसके बाद आंदोलन के लिए निर्धारित स्थल पर आदिवासी सेंगल अभियान के सदस्यों का जमावड़ा होने लगा. देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्रित हुए. इसके बाद बैठक हुई, जिसमें रेलवे ट्रैक को छोड़ एनएच 32 जाम करने का निर्णय लिया गया. इसके बाद आदिवासी सेंगल अभियान के सभी सदस्य रैली के रूप में स्टेशन से निकले और लेंगडीड के सामने सुकसारी मोड़ पर 11 बजे से एनएच 32 को जाम कर दिया. एनएच जाम दो घंटे बाद समाप्त किया गया. इसे भी पढ़ें : पटना:">https://lagatar.in/patna-tejashwi-yadav-attacked-bjp-said-fear-of-2024-inside-bjp/">पटना:

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सड़क पर लगी वाहनों की लंबी कतार

आदिवासी सेंगेल अभियान कोल्हान जोन की ओर से एनएच 32 को जाम किए जाने के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई. जाम में विभिन्न स्कूलों के कई वाहन भी फंस गए हैं, जिस पर छोटे-छोटे बच्चे सवार थे. जाम के दौरान दो पहिया वाहनों को नहीं रोका जा रहा था. सड़क जाम में आदिवासी सेंगल अभियान से जुड़े महिला, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल थे. सभी बैनर पोस्टर के साथ सड़क पर बैठे थे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे. सड़क जाम की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और आंदोलनकारियों से वार्ता कर जाम हटाने का आग्रह किया. आंदोलनकारी वरीय पदाधिकारी के आने की मांग कर रहे थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-raf-conducts-cordon-and-search-operation-behind-sakchi-police-station/">जमशेदपुर

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ये हैं सेंगल अभियान की मांगें 

आदिवासी सेंगल आभियान की मुख्य मांगों में 2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड लागू करने, पारसनाथ पहाड़ में अवस्थि आदिवासियों के ईश्वर मरांग बुरु को अविलंब जैनों के कब्जे से मुक्त कर आदिवासियों को सुपूर्द करने, कुड़ियों को एसटी का दर्जा नहीं देने, संताली को झारखंड का प्रथम राजभाषा का दर्जा देने, झारखंड प्रदेश में संविधान, कानून, मानव अधिकारों को लागू कर इसे लूट, मिट, भष्टाचार का अड्डा बनने से रोकने, सभी आदिवासी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने, असम, अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को अविलंब एसटी का दर्जा देने, आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम में जनतंत्र और संविधान को समाहित करके सुधार लाकर इसे अविलंब समृद्ध करने की मांग शामिल है. [wpse_comments_template]  

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