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चांडिल : जयंती पर भूमिज विद्रोह के महानायक गंगा नारायण सिंह को दी जा रही श्रद्धांजलि

Chandil (Dilip Kumar) : वीर शहीद गंगा नारायण सिंह, वो नाम जिसे सुनने से अंग्रेजी हुकुमत भी कांप उठती थी. जंगल महल क्षेत्र में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फुंकने वाले गंगा नारायण सिंह ने सर्वप्रथम सरदार गोरिल्ला वाहिनी का गठन किया था. गंगा नारायण का जन्म 25 अप्रैल 1790 को ब्रिटिश भारत के जंगल महल के बांधडीह गांव वर्तमान में सरायकेला-खरसावां जिला के नीमडीह प्रखंड में हुआ था. उनके पिता लक्ष्मण नारायण सिंह और माता ममता देवी थीं. गंगा नारायण सिंह बराभूम के राजा विवेक नारायण सिंह के पोते थे. गंगा नारायण सिंह जंगल महल के एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जिन्हें भूमिज विद्रोह के नेता के रूप में जाना जाता है. मंगलवार को उनकी जयंती पर उनके पैतृक गांव नीमडीह प्रखंड के बांधडीह में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित की जा रही है. इस अवसर पर दिन में कई कार्यक्रम होंगे. सबसे पहले गांव के लाया यानी पुजारी पारंपरिक रीति-रिवाज से प्रतिमा स्थल पर पूजा-अर्चना कर शुद्धीकरण किया. इसके बाद श्रद्धांजलि अर्पित किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें :मुसाबनी">https://lagatar.in/musabani-miscreants-damaged-the-statue-of-sido-kanhu-jmm-protest-started/">मुसाबनी

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आसपास के राजा, महाराजा व जमीदारों को किया था एकजुट

[caption id="attachment_618851" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/25-chandil-GANGA-NARAYAN-SINGH-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> बांधडीह में स्थापित शहीद गंगा नारायण सिंह की मूर्ति[/caption] गंगा नारायण सिंह ने 1832-33 में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया. अंग्रेजों ने इसे गंगा नारायण सिंह का हंगामा कहा, जबकि कुछ इतिहासकारों ने इसे चुआड़ विद्रोह कहा है. अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ उन्होंने मानभूम, सिंहभूम, धलभूम, पातकुम, शिखरभूम, पांचेत, झालदा, काशीपुर, वामनी, बाघमुंडी, अंबिका नगर, अमीयपुर, श्यामसुंदरपुर, फुलकुसमा, रानीपुर और काशीपुर के राजा-महाराजा और जमीनदारों का एकजुट किया था. यही कारण था कि शहीद गंगा नारायण सिंह, भूमिज विद्रोह के महानायक कहे जाते हैं. उन्हें हर जाति का समर्थन प्राप्त था. बताया जाता है की अंग्रेजों के शासन और शोषण नीति के खिलाफ लड़ने वाले गंगा नारायण सिंह प्रथम वीर थे. इसे भी पढ़ें :रांची">https://lagatar.in/lawyers-of-ranchi-civil-court-did-judicial-work-by-wearing-black-badges/">रांची

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अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए गंगा नारायण सिंह

गंगा नारायण सिंह अंग्रेजों से लड़ने वाले पहले नायक थे, जिन्होंने सबसे पहले सरदार गुरिल्ला वाहिनी सेना का गठन किया. जिरपा लाया उर्फ जिलपा लाया को सेना का प्रधान सेनापति नियुक्त किया गया था. अंग्रेजों के खिलाफ गंगा नारायण सिंह का आंदोलन तूफान का रूप ले लिया था. वर्तमान के झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल व ओड़िशा के क्षेत्र में सरदार गुरिल्ला वाहिनी का विद्रोह चरम पर था. संघर्ष इतना प्रभावी था कि अंग्रेजों को भूमि बिक्री कानून, उत्तराधिकार कानून, लाख पर उत्पाद शुल्क, नमक कानून, जंगल कानून को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. छह फरवरी 1833 को गंगा नारायण ने कोल यानी हो आदिवासियों के साथ ठाकुर चेतन सिंह के हिंदशहर पुलिस स्टेशन पर हमला किया, इसी क्रम में सात फरवरी 1833 को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई. इसे भी पढ़ें :घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-bike-collided-with-hiva-four-youths-injured-three-serious/">घाटशिला

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