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चांडिल : श्री राणी सती दादी मंदिर में दो दिवसीय भाद्र-अमावस्या महोत्सव 26 व 27 अगस्त को

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Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के डैम रोड चांडिल स्थित श्री राणी सती दादी मंदिर में दो दिवसीय भाद्र-अमावस्या महोत्सव का आयोजन 26 व 27 अगस्त को किया गया है. श्री रानी सती मंडल, चांडिल की ओर से आयोजित महोत्सव के दौरान मंगल पाठ व रात्रि जागरण का कार्यक्रम होगा. इस संबंध में मंडल के नवीन पसारी ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी भाद्र-अमावस्या महोत्सव के शुभ अवसर पर रात्रि जागरण का आयोजन किया गया है. इस दौरान 26 अगस्त रात आठ बजे ज्योत प्रज्ज्वलित करने के बाद आमंत्रित कलाकार टाटानगर के गुलशन कुमार व सुमित्रा बनर्जी एंड टीम द्वारा भजन प्रस्तुत किया जाएगा. इसे भी पढ़े : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-two-day-bhadi-mavas-festival-from-26th-in-rani-sati-temple/">चाकुलिया

: राणी सती मंदिर में दो दिवसीय भादी-मावस महोत्सव 26 से

दूसरे दिन दोपहर में भंडारा का आयोजन 

उन्होंने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन 27 अगस्त को सुबह 7:30 बजे आरती की जाएगी. इसके बाद 10 बजे से मंगलपाठ हाेगा. मंगलपाठ वाचक के रूप में इस वर्ष सुनीता भारद्वाज एंड टीम को आमंत्रित किया गया है. साथ ही दोपहर दो बजे से भंडारा का आयोजन किया गया है. नवीन पसारी ने बताया कि महोत्सव के दौरान स्वामनी का प्रसाद लगाया जाएगा. दादीजी के भक्त भी प्रबंधन कमेटी से संपर्क कर स्वामनी लगा सकते हैं. इसे भी पढ़े : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-two-day-bhadi-amavasya-festival-will-be-celebrated-in-shri-rani-sati-dadi-mandir/">चाईबासा

: श्री राणी सती दादी मंदिर में मनाया जाएगा दो दिवसीय भादी-अमावस्या महोत्सव

आकर्षक रूप से सजा है श्री राणी सती दादी मंदिर

दो दिवसीय भाद्र-अमावस्या महोत्सव के दौरान चांडिल में भोग, अखंड ज्योति, प्रसाद, जवा फूलों द्वारा पूरे मंदिर परिसर की सजावट आदि आकर्षण का विशेष केंद्र रहेगा. यहां श्री दादी जी के आलौकिक रूप का दर्शन करने व भक्ति भाव से भजन और मंगलपाठ करने दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं और दादी जी का आशीर्वाद लेते हैं. नवीन पसारी ने बताया कि श्री राणीसती दादी के अवतरण की कथा महाभारत के अभिमन्यु एवं उत्तरा की कथा से जुड़ी है. श्री कृष्ण के वरदान प्राप्ति के बाद कलयुग में दुर्गा स्वरूपिणी श्री राणीसती दादी की पूजा नारी शक्ति के रूप में त्रिशूल रूप में की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन उनके दर्शन-पूजन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसे भी पढ़े : सरायकेला">https://lagatar.in/seraikela-there-is-a-tradition-of-renting-a-shop-with-the-help-of-access-to-the-municipality/">सरायकेला

: नगरपंचायत में पहुंच के बल दुकान लेकर किराये में लगाने की चली आ रही है परम्परा
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