Chandil (Dilip Kumar) : विशु सेंदरा आदिवासियों की अनोखी व प्राचीन परंपरा
है. विशु शिकार की सबसे अनोखी बात यह है कि पति के शिकार पर निकलने के पहले महिलाएं सिंदूर, कंगन व सुहाग की अन्य निशानियां उतार कर रख देती
हैं. इसके साथ ही अपनी मांग का सिंदूर भी धो देती
हैं. पति के शिकार पर रहने के दरम्यान पत्नी
विधावा की तरह रहती
हैं. शिकार से वापस लौटने पर पति अपनी पत्नी को वापस सुहाग की निशानियां पहनाते
हैं. इस प्राचीन परंपरा का पालन वर्तमान समय में भी किया जाता
है. विशु शिकार में सिर्फ पुरुष ही शिकार पर जाते हैं, लेकिन इसमें महिलाओं की भागीदारी भी कम नहीं
है. पुरुषों के गांव
छोड़कर जंगल जाने के उपरांत महिलाएं ही रात-दिन गांव की रखवाली करती
है. इस दौरान गांव की रखवाली और मनोरंजन के लिए महिलाएं
सड़पा नृत्य करती
हैं. वहीं दूसरी ओर शिकार के दौरान
ढोंगेड़ और
सिंगराई नृत्य करने की भी परंपरा
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alt="" width="748" height="510" /> सेंदरा वीर (फाइल फोटो)[/caption] सेंदरा
वीरों की सलामती के लिए घर में प्रार्थना करती उनकी पत्नियां सेंदरा
वीरों के आने पर खुशी जताती
हैं. शिकार से वापस अपने घर लौटते पर पैर धोकर उनका स्वागत करती
हैं. इसके बाद ही पुरुष अपने घर में प्रवेश करते है और सेंदरा वीर अपनी पत्नी को वापस सुहाग की निशानियां पहनाते
हैं. वहीं शिकार पर जाने से पूर्व हर शिकारी के घर पर पारंपरिक पूजा की जाती
है. इसके बाद सुहागिन
महिलाए अपने पतियों को हथियार
सौंपतीं हैं. पूजा-अर्चना के दौरान कलश या कांसे का लोटा में पानी भर कर पूजा घर में स्थापित किया जाता
है. सेंदरा
वीरों के लौटने के बाद उस कलश को उठाया जाता
है. कलश का पानी यथावत रहने पर उसे शुभ और घट जाने पर अशुभ माना जाता
है. शिकार पर निकले सेंदरा वीर की मौत होने पर उसे शहीद का दर्जा दिया जाता
है. सेंदरा वीर की लाश को गांव नहीं ले जाया जाता बल्कि जंगल में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता
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कांग्रेस ने जंबो जेट कमेटी की घोषणा की, कुमार राजा बोले- जनमुद्दों को लेकर जनता के बीच जायेंगे एक प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण भी है सेंदरा
विशु सेंदरा, जानवरों का शिकार करना ही नहीं बल्कि यह एक प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण व सामाजिक विचार-विमर्श करने का माध्यम
है. विशु सेंदरा के दौरान आदिवासी समाज के लोग
बीहड जंगलों से
जीवनरक्षक जड़ी-बूटी भी ढूंढ़कर लाते
हैं. इस दौरान आदिवासी समाज के बढ़े बुजुर्ग युवाओं को जड़ी-बूटियों की जानकारी भी देते
हैं. वहीं
विशु सेंदरा के दौरान वीर
सिंगराई कार्यक्रम का आयोजन किया जाता
है. सामाजिक मान्यता के अनुसार वीर
सिंगराई सामाजिक पाठशाला
है. इसमें युवाओं को पारिवारिक जीवन के मूल मंत्रों के साथ समाज के बुजुर्गों द्वारा सामाजिक व पारिवारिक जीवन के
गूढ़ रहस्यों की जानकारी दी जाती
हैं. वर्तमान में इस परंपरा का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा
है. विशु शिकार अब तीन-चार दिन तक ही सिमट गया
है. जंगलों में जानवर कम होने के कारण अब लोग जंगलों में जाकर चिंतन-मनन अधिक कर रहे
हैं. [wpse_comments_template]
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