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नुनूचंद महतो का शव पुणे से विष्णुगढ़ पहुंचते ही मचा कोहराम

नुनूचंद महतो का शव शनिवार सुबह पुणे चाकन से विष्णुगढ़ उसके घर पहुंचा. जैसे ही नेहाल महतो के 40  वर्षीय पुत्र नुनूचंद महतो का शव सारूकुदर पंचायत के चिहुंटिया पहंचा तो परिजनों के हृदय विदारक चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया.
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Hazaribagh : नुनूचंद महतो का शव शनिवार सुबह पुणे चाकन से विष्णुगढ़ उसके घर पहुंचा. जैसे ही नेहाल महतो के 40  वर्षीय पुत्र नुनूचंद महतो का शव सारूकुदर पंचायत के चिहुंटिया पहंचा तो परिजनों के हृदय विदारक चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया.

 

नूनूचंद महतो की पत्नी धनेश्वरी देवी का रोते-रोते बुरा हाल हो चुका था, वे लगातार अचेत हो जा रही थी जिनको आसपास की महिलाओं द्वारा संभाला जा रहा था, लेकिन अपने पति को खोने के गम में वह किसी की नहीं सुन रही थी, उनके एक ही शब्द सभी को रुला दे रहे हैं कि हम केकर बिगडले रहनी हा, अब हमनी के केकरा सहारे रहब.

 

उसकी पत्नी यह कह कर दहाड़ मार रही हैं कि मुझे क्या मालूम कि मेरे पति मुझे ठुकरा कर जिंदगी के उस दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देंगे. विधवा पत्नी की बिलाप सुन कर उपस्थित लोग भी अपने-अपने आंसू को नहीं रोक पाए. मृतक नूनूचंद महतो का शव एंबुलेंस से जैसे ही उनके घर पहुंचा तो “क्या बूढ़े, क्या नौजवान एका एक उसके घर के तरफ दौड़ पड़े.

 

मृतक नुनूंचंद महतो की पुत्री देवंती कुमारी (20), कंचन कुमारी (15) और पुत्र राकेश कुमार (18) मृत पिता के शव को निहार-निहार बिलख रहे थे और उनकी आंखों के आंसू भी सुख गये थे. 

 

बताते चलें कि नूनूचंद महतो की मौत पुणे में गुरुवार को काम के दौरान बिल्डिंग से गिरने से घटनास्थल पर ही हो गई थी. वह घर के एकलौता कमाऊ व्यक्ति थे. उनके जाने से बेटे और बेटियां का भविष्य अधर पर लटक गया हैं.

 

इस दुखद घटना में मुखिया संघ के अध्यक्ष उत्तम महतो, पंचायत समिति सदस्य महेश महतो, प्रवासी हित में कार्य करने वाले सिकंदर अली ने पहुंचकर संवेदना प्रकट करते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया.

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