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Chatra News : टंडवा मॉब लिंचिंग मामले में भाजपा का सरकार पर हमला, कहा- बेगुनाहों को न फंसाए पुलिस

जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के बड़गांव में नाबालिग बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों के बाद हुई मॉब लिंचिंग की घटना अब राजनीतिक रंग लेने लगी है
 

Chatra : जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के बड़गांव में नाबालिग बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों के बाद हुई मॉब लिंचिंग की घटना अब राजनीतिक रंग लेने लगी है. प्रदेश में सरकार कि विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुरे घटनाक्रम के वास्तविक दोषियों पर कठोर कार्रवाई कि मांग की है, कहा है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाया नहीं जाना चाहिये.

 

भाजपा के जिलाध्यक्ष रामदेव सिंह भोक्ता और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक किशुन दास ने नाबालिग से दुष्कर्म जैसी जघन्य घटना के आरोपियों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ने की मांग कि है. 

 

साथ ही मॉब लिंचिंग की घटना में शामिल दोषियों पर भी कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करे, लेकिन पूरी कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई हो. 

 

भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों को भी नामजद और अज्ञात अभियुक्त बनाया गया है. ऐसे में पुलिस को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान करनी चाहिए और बेगुनाह लोगों को किसी तरह की अनावश्यक कार्रवाई या उत्पीड़न से बचाना चाहिए.

 

वहीं भाजपा नेता एवं मुखिया विजय चौबे का नाम मॉब लिंचिंग मामले में सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है. भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस नाबालिग से दुष्कर्म की गंभीर घटना की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मॉब लिंचिंग मामले में एकतरफा कार्रवाई कर रही है. 

 

भाजपा नेताओं का कहना है कि दोनों मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून सम्मत जांच होनी चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिले, वास्तविक दोषियों को सजा मिले और कोई भी निर्दोष व्यक्ति बेवजह कानूनी कार्रवाई का शिकार न बने.

 

भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सिमरिया विधायक किशुन दास ने दावा किया कि दो अगस्त को इमरोज अंसारी ने एक दलित नाबालिग युवती का अपहरण कर अपने घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया. उन्होंने कहा कि युवती किसी तरह वहां से निकलकर अपने परिजनों तक पहुंची और पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद ग्रामीण आरोपी के घर पहुंचे, जहां उसके साथ मारपीट हुई. 

 

किशुन दास ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में मारपीट हुई और इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि इस मामले में 56 लोगों को नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें कई निर्दोष लोगों के नाम शामिल होने की आशंका है. 

 

उन्होंने मांग की कि पुलिस निष्पक्ष अनुसंधान कर यह सुनिश्चित करे कि दोषी किसी भी कीमत पर बच न सकें और निर्दोषों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म मामले में चार लोगों को आरोपित बताया गया है, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है. उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि एकतरफा कार्रवाई से समाज में गलत संदेश जाएगा. 

 

किशुन दास ने दुष्कर्म पीड़िता के माता-पिता को जेल भेजे जाने पर भी चिंता जताई और कहा कि परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं. ऐसे में प्रशासन को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ अनुसंधान के दौरान माता-पिता में से किसी एक को राहत देने पर विचार करना चाहिए, ताकि परिवार बिखरने से बच सके.

 


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