- अमीर समझकर गलतफहमी में टेम्पो चालक का किया था अपहरण
Chatra News : चतरा पुलिस ने नगवां मोहल्ला निवासी अपहृत ऑटो चालक तिलक यादव को सकुशल मुक्त करा लिया है. एसडीपीओ सन्नी वर्धन के नेतृत्व में गठित एसआईटी नें उसे बिहार के गयाजी जिले के बाराचट्टी स्थित घने जंगल में स्थित एक वीरान घर से बरामद किया. पुलिस ने अपहरण में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है.छापेमारी में बाराचट्टी थाना पुलिस और एसएसबी के जवान भी शामिल थे.
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पुलिस के अनुसार, अपहरण में करीब आधा दर्जन बदमाश सामिल थे. उनलोगों ने तिलक को अमिर समझ कर फिरौती के लिए अगवा किया था. यह जानकारी एसपी अनिमेष नैथानी ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने बताया कि घटना के बाद एसडीपीओ सन्नी वर्धन के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने अनुसंधान शुरू किया.
एसपी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पहले बाराचट्टी के धनगांई थाना क्षेत्र के रेवदा इलाके में तिलक का मोबाइल लोकेशन मिला. इसके बाद एसडीपीओ के नेतृत्व में सादे लिबास में चतरा पुलिस ने बिहार के बाराचट्टी क्षेत्र में कैंप कर निगरानी शुरू की. इसी दौरान तिलक की लोकेशन इटवा गांव के समीप चैलीखार नदी किनारे जंगल में मिली. लोकेशन मिलते ही एसडीपीओ सन्नी वर्धन टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तिलक को नाटकीय ढंग से सकुशल बरामद कर लिया. पुलिस ने मौके से दो अपहर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तार आरोपियों में चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र निवासी कैलाश दांगी ल धनगांई थाना क्षेत्र के पतलूका गांव निवासी मनोज कुमार शामिल हैं. पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बाइक और दो मोबाइल भी जप्त किये हैं.
एसपी ने बताया कि अपराधियों नें गलतफहमी में तिलक का अपहरण कर लिया था. उनलोगों पहले तिलक के घर की रेकी की थी. उन्हें लगा कि शहर के रिहायसी इलाके में तिलक का घर है और इसके नाम पर कई जमीन और प्लॉट है. जिससे तिलक को प्रतिमाह डेढ़ से दो लाख रुपये की आमदनी होती होगी. इसे देखते हुए उनलोगों ने उसके अपहरण की योजना बनाई.
एसपी ने बताया कि अपहर्ताओं ने तिलक के मोबाइल से उसके परिजनों को फोन करवाकर 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी. जान बचाने के लिए वह एक लाख रुपये देने को तैयार था. तिलक ने परिजनों को फोन पर पैसे देने को भी कह दिया था. लेकिन अपहर्ता कम पैसा लेने के लिये राजी नहीं हुए. एसपी ने बताया कि घटना में शामिल सभी अपराधियों की पहचान कर ली गई है. जल्द ही बाकी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
गिरफ्तार कैलाश का लंबा आपराधिक इतिहास है. उसके विरुद्ध झारखंड-बिहार के अलग-अलग स्थान में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. वह 10 साल जेल में रहकर हाल के दिनों में बाहर निकाला है. वहीं मनोज भी पूर्व में अवैध शराब तस्करी के मामले में बिहार में जेल गया था.
अपहर्ताओं नें यात्री बनकर बुक किया था टेम्पो
अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त होने के बाद तिलक ने पुलिस को बताया कि वह 13 सितंबर को रोज की तरह विनय भारती पार्क के समीप स्थित घर से ऑटो लेकर निकला था. इसी दौरान डीसी कार्यालय के समीप एक व्यक्ति ने चावल व आटा लेकर राजपुर जाने की बात कहकर उसका टेम्पो बुक किया था. राजपुर पहुंचने के बाद उसने तिलक को मुख्य सड़क छोड़कर जंगल के रास्ते थोड़ी दूर और चलने को कहा. इस एवज में उसने तिलक को एकस्ट्रा पैसा भी देने कि बात कही थी. कुछ दूर जाने पर तीन बाइक से छह लोग पहुंचे और उसे पकड़कर आंखों पर कपड़ा बांध दिया. इसके बाद पैदल जंगल में काफी दूर ले जाकर बंधक बना लिया.
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