- मुख्य निर्माण एजेंसी इरकॉन ने अपने सहयोगी एजेंसी पर सदर थाना में दर्ज कराया फर्जीवाड़े का एफआईआर
- डीएमओ ने भी पुलिस को भेजा विस्तृत शिकायत पत्र
- मेसर्स इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने राजा कंस्ट्रक्शन को पेटी कांट्रैक्ट पर दिया था मिट्टी उठाव का काम
- 45 लाख 50 हजार घन मीटर मिट्टी खनिज के फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र से जुड़ा है मामला
- मुख्य कार्य एजेंसी इरकान को उसकी सहायक कंपनी नें सौंपा था फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र
Chatra : जिले के बहुचर्चित खनन व राजस्व घोटाला मामले ने नया मोड़ ले लिया है. शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन निर्माण परियोजना से जुड़े इस मामले में करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े, सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी और राजस्व नुकसान के आरोप सामने आए हैं.
जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो द्वारा सदर थाना को भेजे गए विस्तृत शिकायत पत्र और परियोजना की मुख्य निर्माण एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है.
मिट्टी उठाव कार्य से जुड़ा है पूरा मामला
डीएमओ द्वारा सदर थाना को भेजे गए पत्र के अनुसार, शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन निर्माण परियोजना का मुख्य ठेका इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के पास है. लेकिन कंपनी ने मिट्टी उठाव समेत कुछ निर्माण कार्य मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन को पेटी कांट्रैक्ट के रूप में सौंपा था.
आरोप है कि गया जी (बिहार) के मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन ने 45 लाख 50 हजार घनमीटर मिट्टी खनिज के उठाव के बाद रॉयल्टी भुगतान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर इरकॉन से भुगतान लेने की प्रक्रिया शुरू की थी. हालांकि बाद में जांच में यह मामला संदेह के घेरे में आ गया.
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिन स्वामित्व प्रमाण पत्रों के आधार पर राजा कंस्ट्रक्शन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड से भुगतान का दावा किया, वे जिला खनन कार्यालय से निर्गत ही नहीं हुए थे.
पत्राचार से खुला राज, फर्जी लेटर हेड से लेकर नकली निर्गत पंजी तक का हुआ इस्तेमाल
डीएमओ मनोज टोप्पो ने पत्र में उल्लेख किया है कि इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक मोहन सिंह के साथ हुए पत्राचार और उनके द्वारा कार्यालय को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
शिकायत के अनुसार, राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा प्रस्तुत स्वामित्व प्रमाण पत्रों में दर्ज कई पत्रांक और तिथियां जिला खनन कार्यालय के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती हैं. इतना ही नहीं, डीएमओ ने मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन पर जिला खनन कार्यालय के नाम से कथित रूप से फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर और निर्गत पंजी तैयार कर इसका दुरुपयोग करने की बात कही है.
डीएमओ का दावा है कि जांच में यह भी सामने आया है कि जिन पत्रों को आधार बनाकर राजा कंस्ट्रक्शन ने मिट्टी खनिज के स्वामित्व का दावा किया, उसका रिकॉर्ड जिला खनन कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है.
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के माध्यम से लगभग 45.50 लाख घन मीटर मिट्टी खनिज के रॉयल्टी का भुगतान लेने का अवैध तरिके से प्रयास किया गया है.
16 कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर भुगतान लेने का प्रयास
दस्तावेजों के अनुसार, मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को मिट्टी खनिज के स्वामित्व भुगतान के लिए 16 स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे. जिसे जिला खनन कार्यालय की जांच में फर्जी बताया गया है.
डीएमओ ने राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सौंपे गए कथित फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों का विवरण समेत करीब 65 पन्नों का साक्ष्य सदर थाना को सौंपा है. इन दस्तावेजों में दर्शाई गई मिट्टी खनिज की कुल मात्रा 45 लाख 50 हजार घनमीटर बताई गई है.
राजस्व हानि के साथ सरकारी रिकॉर्ड्स की जालसाजी व संस्थागत धोखाधड़ी का मामला
खनन विभाग के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़े व घोटाले की अनुमानित वित्तीय राशि करीब 26 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. खनन विभाग का मानना है कि यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की जालसाजी और संस्थागत धोखाधड़ी का गंभीर प्रकरण है.
घोटाले के षड्यंत्र के सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है. प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही है. इतना ही नहीं जिला प्रशासन राजस्व घोटाले के इस घिनौनी साजिश के मास्टरमाइंड की भी तलाश कर रही है.
| क्रमांक | पत्रांक | तिथि | मात्रा (घनमीटर में) |
| 01 | 741 | 29.08.2023 | 1,75,000 |
| 02 | 748 | 31.08.2023 | 2,50,000 |
| 03 | 821 | 15.09.2023 | 2,50,000 |
| 04 | 815 | 14.09.2023 | 2,75,000 |
| 05 | 890 | 30.09.2023 | 4,00,000 |
| 06 | 1539 | 12.12.2023 | 4,30,000 |
| 07 | 321 | 03.04.2024 | 5,30,000 |
| 08 | 480 | 17.05.2024 | 4,15,000 |
| 09 | 696 | 29.06.2024 | 2,50,000 |
| 10 | 571 | 18.06.2025 | 1,50,000 |
| 11 | 594 | 24.06.2025 | 3,10,000 |
| 12 | 611 | 01.07.2025 | 2,75,000 |
| 13 | 615 | 03.07.2025 | 1,50,000 |
| 14 | 619 | 04.07.2025 | 1,25,000 |
| 15 | 656 | 18.07.2025 | 3,15,000 |
| 16 | 662 | 21.07.2025 | 2,50,000 |
जिला खनन कार्यालय के फर्जी लेटरहेड पर सौंपे स्वामित्व प्रमाण पत्र
जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो द्वारा सदर थाना को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त पत्रों का सत्यापन जिला खनन कार्यालय के अभिलेखों से किया गया, जिसमें पाया गया कि ये पत्र कार्यालय से निर्गत नहीं हुए थे.
आरोप है कि जिला खनन कार्यालय के नाम से फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर और निर्गत पंजी का उपयोग कर स्वामित्व प्रमाण पत्र तैयार किए गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड से भुगतान प्राप्त करने का प्रयास किया गया.
हरहाल में वसूली जाएगी राजस्व की राशि : डीएमओ
इधर डीएमओ मनोज टोप्पो ने पुलिस से दोषी एजेंसी और संबंधित व्यक्तियों के खिलाउ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में राजस्व क्षति की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसियों से हर हाल में उसकी वसूली सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हर पहलू की होगी गहनता से जांच, बक्से नहीं जाएंगे जालसाज : थाना प्रभारी
वहीं सदर थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक अवधेश सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेलवे लाइन निर्माण कार्य में लगी मेसर्स इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की शिकायत पर उसकी सहायक कंपनी राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.
उन्होंने बताया कि खनन विभाग की ओर से भी पत्र प्राप्त हुआ है. प्राप्त शिकायत और दस्तावेज के आधार पर हर संभावित पहलू की गहनता से जांच की जा रही है. दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित एजेंसियों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन सहित सभी बिंदुओं की जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
जांच पर टिकी सबकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की जांच चतरा सदर थाना पुलिस कर रही है. पुलिस दस्तावेजों की वैधता, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल में जुटी है. ऐसे में अब लोगों की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल मामले की पुलिसिया जांच पर ही टिकी है.
कहा जा रहा है कि यदि जांच में खनन विभाग द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चतरा जिले के इतिहास के सबसे बड़े कथित चालान और राजस्व घोटाला मामलों में से एक माना जा सकता है. क्योंकि जो आकलन लगाए जा रहे हैं, उसके अनुसार, प्रथम दृष्टया यह करीब 26 करोड़ से ज्यादा के राजस्व घोटाले का है.
अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आंकड़ा जांच के साथ बढ़कर अप्रत्याशित आंकड़े को छू सकता है.
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