Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

झारखंड की जेलों में भी पैसे वालों का राज! अपराधियों व नक्सलियों को मिल रही VIP सुविधाएं

4 जून को लगातार डॉट इन ने ''झारखंड की जेलों में बंद कैदियों और उनके परिजनों से सुविधा देने के नाम पर लाखों की अवैध वसूली'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. आज उसी कहानी का दूसरा पहलू भी सामने है.
Advertisement
Advertisement

Ranchi : 4 जून को लगातार डॉट इन ने ''झारखंड की जेलों में बंद कैदियों और उनके परिजनों से सुविधा देने के नाम पर लाखों की अवैध वसूली'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. आज उसी कहानी का दूसरा पहलू भी सामने है.

 

झारखंड की कई जेलों को लेकर लंबे समय से यह आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं कि प्रभावशाली अपराधियों और नक्सलियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. विभिन्न जिलों में प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान भी इस तरह की बातें समय-समय पर चर्चा में रही हैं. 

 

कल पढ़े :   जेल में बंद, लेकिन नेटवर्क चालू! क्या पैसे और पहुंच के दम पर जेल से नेटवर्क चला रहे हैं झारखंड के अपराधी?

पलामू, रांची, हजारीबाग, दुमका व धनबाद जेल में मिल रहीं VIP सुविधाएं 

पलामू के मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में बंद एक बड़े अपराधी और दो शीर्ष नक्सलियों को कथित तौर पर VIP सुविधाएं मिलने की चर्चा कई बार सामने आ चुकी है. रांची के होटवार जेल में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा समेत कई बड़े अपराधी, नक्सली और पूर्व अधिकारी बंद हैं. आरोप है कि इनमें से कुछ प्रभावशाली बंदियों को जेल के भीतर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. 

 

हजारीबाग मंडल कारा में बंद गैंगस्टर विकास तिवारी और अन्य प्रभावशाली कैदियों को भी कथित रूप से विशेष सुविधाएं दिए जाने की चर्चा है. कहा जाता है कि विकास तिवारी जेल का खना नहीं खाता. उसके लिए  हर दिन बाहर से खाना मंगाया जाता है.

 

साथ ही उन्हें महंगे ब्रांड का पैकेज्ड पानी उपलब्ध कराया जाता है. एक पानी की बोतल की कीमत करीब 200 होती है.  दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह को लेकर भी सबसे अधिक चर्चाएं होती रही हैं. आरोप है कि उन्हें ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो सामान्य बंदियों को नहीं मिलतीं.

 

इधर, धनबाद जेल में बंद कथित कोयला माफियाओं और लातेहार से गिरफ्तार शीर्ष नक्सलियों को लेकर भी समय-समय पर विशेष सुविधाएं मिलने के आरोप सामने आते रहे हैं. 

कोडरमा मंडल कारा सबसे अधिक चर्चा में

इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा कोडरमा मंडल कारा को लेकर हो रही है. यहां एक बंदी ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पैसों के लेन-देन से जुड़े स्क्रीनशॉट साझा कर गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा किया गया है कि पैसे देने वाले बंदियों को अधिक सुविधाएं मिलती हैं, जबकि अन्य कैदियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 

 

निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं सवाल

यदि पलामू, रांची, हजारीबाग, दुमका, धनबाद, लातेहार और कोडरमा जैसी विभिन्न जेलों से लगातार एक जैसी शिकायतें और चर्चाएं सामने आ रही हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल केवल जेल प्रशासन पर ही नहीं, बल्कि जेल मुख्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी उठते हैं.

 

राज्य की जेलों की निगरानी की जिम्मेदारी जेल अधीक्षक से लेकर मुख्यालय और जेल आईजी स्तर तक होती है. ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि जब शिकायतें बार-बार सामने आती हैं, तो उनकी जांच और कार्रवाई का परिणाम सार्वजनिक रूप से क्यों दिखाई नहीं देता. क्यों जांच और कार्रवाई केवल कागजों में ही रह जाती है. 

 

इन सवालों का जवाब केवल संबंधित जेल अधीक्षकों को ही नहीं, बल्कि जेल मुख्यालय को भी देना चाहिए. क्योंकि जब एक-दो नहीं, बल्कि कई जेलों को लेकर एक जैसी शिकायतें सामने आने लगें, तो लोगों की नजर पूरी व्यवस्था और उसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों पर भी जाती हैय 

 

पैसों के दम पर जेल के अंदर मिल रहीं वीआईपी सुविधाएं

झारखंड की जेलें सुधार गृह हैं. ऐसे में व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि किसी भी प्रकार की कथित अनियमितताओं पर रोक लगे और किसी भी बंदी को नियमों से परे VIP सुविधाएं न दी जाएं. 

 

कल लगातार डॉट इन से सवाल उठाया कि जेलों में कैदियों और उनके परिजनों से सुविधाओं के नाम पर कथित वसूली हो रही है. वहीं आज यह सवाल है कि क्या उसी कथित पैसे के दम पर कुछ अपराधियों, गैंगस्टरों और नक्सलियों को जेल के अंदर VIP सुविधाएं दी जा रही हैं?

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही