- आंदोलन को नेताओं व जनप्रतिनिधियों का समर्थन
- अब चतरा के रास्ते नहीं जाने देंगे हजारीबाग का कोयला
Chatra : चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र की देल्हो घाटी में हाइवा के धक्के से सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मौत के बाद जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है. जवान का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के बाद ग्रामीण फिर सड़क पर उतर आए हैं. पिछले 45 घंटे से अधिक समय से चतरा–सिमरिया मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम है. आंदोलन को अब जनप्रतिनिधियों का भी खुला समर्थन मिलने लगा है.
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आंदोलन को सिमरिया के झामुमो नेता मनोज चंद्रा, पूर्व मंत्री राजद नेता सत्यानंद भोक्ता के अलावा सिमरिया विधायक उज्जवल दास व सांसद कालीचरण सिंह ने भी समर्थन दिया है. आंदोलनकारियों की मांग है कि मृत जवान के आश्रितों को उचित मुआवजा, हाइवा चालक पर कार्रवाई और हजारीबाग के कोयले की ढुलाई चतरा के रास्ते से पूरी तरह बंद की जाए. सड़क जाम के कारण चतरा–हजारीबाग और चतरा–टंडवा–रांची मार्ग पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है. सीसीएल और एनटीपीसी की परियोजनाओं से कोयले का डिस्पैच भी पूरी तरह प्रभावित है.
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिदिन सैकड़ों हाइवा के परिचालन, ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन और संबंधित कंपनियां कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं. सिमरिया सीओ व थाना प्रभारी आंदोलनकारियों से वार्ता कर जाम समाप्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है.
अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे झामुमो के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनोज चंद्रा ने कहा कि किसी भी सूरत में हजारीबाग के कोयले की ढुलाई अब चतरा के रास्ते नहीं होने देंगे. जिला प्रशासन कोल कंपनियों के सामने नतमस्तक है. हाइवा की चपेट में आकर अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है. धरना स्थल पर पहुंचे सिमरिया विधायक उज्ज्वल दास ने कहा कि क्षेत्र में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं. अब किसी भी कीमत पर हजारीबाग के चट्टी-बरियातू क्षेत्र से निकलने वाले कोयले की ढुलाई चतरा के रास्ते नहीं होने देंगे.
इधर, चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि हजारीबाग से निकलने वाले कोयले की ट्रांसपोर्टिंग का लाभ हजारीबाग जिले को मिलता है, जबकि चतरा के लोगों को केवल धूल, दुर्घटनाएं और मौत मिल रही है. सांसद ने कहा कि प्रशासन से वार्ता जारी है. यदि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती है, तो चतरा के रास्ते हजारीबाग के कोयले की ढुलाई किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी.
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