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Important News: झारखंड सरकार आर्थिक संकट से उबरने के लिए बढ़ा सकती है जनता पर टैक्स का बोझ

Ranchi: राज्य सरकार आर्थिक संकट से उबरने के लिए जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा सकती है. केंद्र सरकार द्वारा G-RAM-G में राज्य पर आर्थिक बोझ डालने और GST में जनता को दी गयी राहत के अलावा केंद्र सरकार द्वारा अनुदान मद में अब तक सिर्फ 126 करोड़ रुपये ही दिये जाने की वजह से राज्य के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है. सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार पर 6000-8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने का अनुमान किया है. 


इस स्थिति से निपटने के लिए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्त सचिव को पत्र लिखकर कर-राजस्व(Tax Revenue) और गैर कर राजस्व(Non Tax Revenue) बढ़ाने पर विचार करने के लिए एक समिति गठित कर विचार करने का सुझाव दिया है.

 

वित्त मंत्री ने कर और गैर राजस्व को बढ़ाने पर विचार करने का सुझाव दिया है. राज्य सरकार GST में किसी तरह का संशोधन नहीं कर सकती है. यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है. इसलिए वित्त मंत्री के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद सरकार कर-राजस्व बढ़ाने के लिए उन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ा सकती है, जो VAT के दायरे मे हैं. VAT के दायरे में पेट्रेल-डीजल और शराब जैसी चीजें हैं. ग़ैर-कर राजस्व के दायरे में लाइसेंस फीस, माल ढुलाई पर लगने वाला टैक्स, खनिजों पर टैक्स आदि शामिल है. इसलिए वित्त मंत्री के सुझाव के आलोक राजस्व बढ़ाने के लिए गैर-कर राजस्व के दायरे में आने वाली चीजों के वर्तमान दर को बढ़ाया जा सकता है.

 

वित्त मंत्री ने विभागीय सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने टैक्स के हर स्रोत से मिलने वाली राशि का अनुमानित लक्ष्य निर्धारित किया है. जो निम्नलिखित है - 

- राज्य के स्वकर से 46,000.00 करोड़ रुपये
- गैर-कर राजस्व से 20,700.00 करोड़ रुपये
- केंद्रीय करों में हिस्सेदारी से 51236.38 करोड़ रुपये
- केंद्रीय अनुदान के रूप में 18273.66 करोड़ रुपये

 

वित्त मंत्री द्वारा विभागीय सचिव को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलायी जाती हैं. इससे राज्य को अतिरिक्त पैसों की जरूरत होती है. सरकार ने राज्य पर चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 6000-8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान किया है. लेकिन केंद्र सरकार ने केंद्रीय अनुदान मद में सात जुलाई 2026 तक सिर्फ 126 करोड़ रुपये ही दिये हैं. यह इस मद में मिलने वाली राशि का सिर्फ 0.69% है. इस स्थिति को देखते हुए जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाये बिना राजस्व बढ़ाना मुश्किल है. वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर राजस्व बढ़ाना जरूरी है ताकि केंद्र पर राज्य की निर्भरता कम हो सके.


वित्त मंत्री ने अपने पत्र में राजस्व बढ़ाने के कुछ उपाय भी सुझाये हैं. उन्होंने लिखा है कि खनिजों की ढुलाई के लिए कितने वाहन निबंधित हैं. इसका सही-सही आकलन कर राजस्व बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए खान और परिवहन विभाग को मिलाने पर विचार किया जा सकता है. इसके अलावा राज्य की विभिन्न कंपनियों के पास 20 मिलियन टन फाइंस आयरन ओर पड़े होने की जानकारी है. यह पिछले 25-30 वर्षों से पड़ा हुआ है. अगर सरकार इसे बेचने के लिए परमिट जारी करे तो GST चालान से सरकार को हजारों करोड़ रुपये मिल सकता है.

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