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Chatra News : DMO पर 17.29 करोड़ की रॉयल्टी गड़बड़ी व घूसखोरी के गंभीर आरोप

जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी, ब्लैकमेलिंग करने और सरकारी राजस्व में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं. यह आरोप हंटरगंज प्रखंड निवासी व चर्चित पत्थर कारोबारी श्रीनिवास ने लगाये हैं, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है.
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  • श्रीनिवास ने उठाये सवाल, आखिर इरकॉन व राजा कंस्ट्रक्शन को किसका है संरक्षण
  • जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने सभी आरोपों को निराधार बताया

Chatra  :  जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी, ब्लैकमेलिंग करने और सरकारी राजस्व में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं. यह आरोप हंटरगंज प्रखंड निवासी व चर्चित पत्थर कारोबारी श्रीनिवास ने लगाये हैं, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है.

 

समाहरणालय के समीप एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान श्रीनिवास ने दावा किया उनके पास व्हाट्सएप चैट, विभागीय दस्तावेज और अन्य कई साक्ष्य मौजूद हैं, जो जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो को भ्रष्ट व घूसखोर अधिकारी साबित करने के लिये पर्याप्त हैं.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन परियोजना में कार्यरत एजेंसियों के माध्यम से करीब 28 महीनों तक फर्जी माइनिंग रॉयल्टी चालान जारी किए गए, जिसके कारण सरकार को लगभग 17 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है.

 

श्रीनिवास ने यह भी दावा किया है कि इस पूरे मामले में जिला खनन कार्यालय की भूमिका संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच होने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत डीसी, एसपी के अलावा ईडी, एसीबी और सीबीआई समेत अन्य जांच एजेंसियों से भी की गई है.

 

पत्थर कारोबारी ने जिला प्रशासन से डीएमओ के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पूरे मामले की जांच कराई जाती है तो यह झारखंड के सबसे बड़े खनन घोटालों में से एक साबित हो सकता है.

 

श्रीनिवास ने दावा किया कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की राशि 17 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि मामले के तूल पकड़ने के बाद वास्तविक दोषियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने के लिए विभाग के निचले स्तर के किसी कर्मचारी पर कार्रवाई कर सकता है.

 

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो वह इसका भी विरोध करेंगे और मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे. साथ ही साथ उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर चतरा में चल रहे अवैध खनन, बालू, पत्थर, कोयला कारोबार पर लगाम नहीं लगाया गया और दोषी डीएमओ के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो बाध्य होकर वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे.

 

इतना ही नहीं श्रीनिवास नें खनन कार्यालय व डीएमओ के संरक्षण में नियम विरुद्ध निर्गत माइंस और क्रशरों के संचालन पर भी सवाल खड़े किये हैं. कहा है कि डीएमओ और खनन कार्यालय को बगैर सीटीओ और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज संचालित क्रशर और माइंस नहीं दिखते. जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और घूसखोरी का जीता जगता सबूत है.

 

वहीं दूसरी ओर जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि यह मामला 17.29 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि करीब 26 करोड़ रुपये की रॉयल्टी गड़बड़ी से जुड़ा है, जिसका खुलासा स्वयं खनन विभाग द्वारा किया गया है. डीएमओ के अनुसार, मामले की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है.

 

जांच में परियोजना से जुड़ी एजेंसी इरकॉन और उसकी सहयोगी कंपनी राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं. इसी आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है.

 

 

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