लोगों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. इसी क्रम में पंचायत के कमलवार गांव में मुख्य मार्ग के समीप रखी गई एक आरसीसी बेंच की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है.
स्थानीय लोगों के अनुसार यह बेंच मात्र एक नट-बोल्ट के सहारे टिकी हुई है. जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. बेंच में कई जगह दरारें भी दिखाई दे रही हैं. जिससे इसके निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग की आशंका व्यक्त की जा रही है.
सबसे चिंताजनक बात यह है कि उक्त बेंच झाड़ियों के बीच 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन विद्युत पोल के समीप रखी गई है. जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है.
बीडीओ ने कहा होगी जांच
प्रखंड विकास पदाधिकारी नितेश भास्कर ने कहा कि पाण्डेयबारा में आरसीसी बेंच से संबंधित अब तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है. पाण्डेयबारा में 15वें वित्त आयोग योजना के तहत कराए गए कार्यों की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल उठे हैं. जिसके संबंध में संबंधित अभिलेख मंगवाए जा रहे हैं. साथ ही कनीय अभियंता और सहायक अभियंता से योजना की जांच भी कराई जाएगी.
उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग से संचालित योजनाओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया है. जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कार्य प्राक्कलन के अनुरूप हुआ है या नहीं, प्राक्कलन में क्या प्रावधान था तथा कार्य की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुसार है या नहीं. पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
आरोप बेबुनियाद : मुखिया
पाण्डेयबारा पंचायत की मुखिया रेखा देवी ने कहा कि पंचायत में आरसीसी बेंच निर्माण को लेकर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. उन्होंने बताया कि पंचायत में लगाए गए सभी आरसीसी बेंच स्वीकृत एस्टीमेट और एमबी (मेजरमेंट बुक) के आधार पर बनाए गए हैं और उसी के अनुरूप भुगतान किया गया है. पंचायत में कुल 50 आरसीसी बेंच लगाए गए हैं और सभी बेंच मौजूद हैं. यदि किसी प्रकार का आरोप लगाया जा रहा है तो प्रशासन और आम जनता इसकी जांच कर सकती है.
मुखिया ने कहा कि एस्टीमेट के अनुसार प्रत्येक बेंच की लागत करीब 12,400 रुपये निर्धारित है. लाभुक समिति के माध्यम से राशि की निकासी की गई है. कुल खर्च का आकलन 12,400 रुपये को 50 बेंचों से गुणा कर किया जा सकता है.
समाजसेवी ने उठाए सवाल
आईसीसी बेंच को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों पर समाजसेवी जीतू यादव ने कहा कि यह प्रशासनिक जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि जनता की ओर से शिकायतें मिल रही हैं कि कहीं बेंच टूटे हुए हैं, तो कहीं उनमें नट-बोल्ट तक नहीं लगे हैं. कई स्थानों पर बेंच निर्धारित जगह पर नहीं लगाकर अन्यत्र रख दिए गए हैं.
ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने कहा कि एक बेंच की लागत 12,400 रुपये बताई जा रही है. जबकि उनके अनुसार इसकी वास्तविक कीमत मुश्किल से 1,200 से 1,500 रुपये से अधिक नहीं हो सकती.
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