Garhwa: सरकार भले ही आदिम जनजाति परिवार को कई मूलभूत सुविधाओं देने की बात करे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. गढ़वा प्रखंड के भदुआ गांव के विस्थापित परिवार के बच्चे आज भी पेड़ के नीचे पढ़ने को विवश हैं. भदुआ के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जो पेड़ के नीचे संचालित हैं, उसमें कक्षा 1 से पांचवी तक की पढ़ाई होती है. उक्त विद्यालय मे 40 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश अकेला ने बताया कि 2001 में अनराज डैम बनने के बाद भदुआ गांव डूब क्षेत्र में पड़ गया. ऐसे में उक्त गांव के लोगों को विस्थापित कर दिया गया. अकेला ने कहा कि गांव के लोग भदुआ गांव के सटे फॉरेस्ट की भूमि पर रहने लगे. भदुआ गांव के विद्यालय को उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पचकेड़ी में समायोजित कर दिया गया. लेकिन विद्यालय के बच्चे और शिक्षक वहीं पढ़ते और पढ़ाते रह गए. उक्त विद्यालय की पढ़ाई पेड़ के नीचे बैठकर बच्चे करते हैं. मध्यान्ह भोजन और ऑफिस पेयजल के बनाए गए टंकी के नीचे किया जाता है. उस गांव के आदिम जनजाति परिवार के सदस्यों में काफी आक्रोश है. गांव के आदिम जनजाति परिवार के सदस्यों का कहना है 2001 से इसी तरह पेड़ के नीचे पढ़ाई हो रही है. लेकिन आज तक कोई भी पूछने नहीं लिया.
आदिम जनजाति परिवार के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगेः ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार के इस रवैये को आदिम जनजाति परिवार के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस बार के चुनाव का हम सभी विरोध करेंगे.
बताते चले की 1987 में अनराज डैम बनने के बाद भदुआ गांव डूब क्षेत्र में पड़ गया. उसके बाद वहां से लोगों को विस्थापित किया जाने लगा. कई लोग भदुआ से विस्थापित होकर दूसरे जगह चले गए. लेकिन आदिम जनजाति परिवार के लोग भदुआ गांव से सटे पहाड़ पर फॉरेस्ट की जमीन पर रहने लगे. 2001 से चल रहे उसविद्यालय का भवन नहीं बनाया गया.ऐसे में बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते हैं. इसे भी पढ़ें - गांदरबल">https://lagatar.in/three-people-from-bihar-died-in-ganderbal-terrorist-attack-cm-expressed-grief-announced-compensation-of-rs-2-lakh-each/">गांदरबल
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