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CJI ने कहा, पारिवारिक अदालतों में न्यायाधीश-अधिवक्ता-पुलिस वर्दी में नहीं आयेंगे, जानें इसकी वजह

सीजेआई ने यक्ष प्रश्न किया, क्या पारिवारिक अदालतों में काले वस्त्र होने चाहिए. पूछा कि क्या वकीलों के काले कपड़े और पुलिस की खाकी वर्दी बच्चों के मन में मनोवैज्ञानिक भय पैदा नहीं करेंगे?
 

New Delhi :  पारिवारिक अदालतों में बच्चों के मन से मनोवैज्ञानिक भय को दूर करना महत्वपूर्ण है. इसके लिए न्यायालयों के पारंपरिक कामकाज में कुछ बदलाव लाने जरूरी है.

 

सीजेआई सूर्यकांत ने कल सोमवार को यह बात कही. साथ ही सीजेआई ने यक्ष प्रश्न किया, क्या पारिवारिक अदालतों में काले वस्त्र होने चाहिए. पूछा कि क्या वकीलों के काले कपड़े और पुलिस की खाकी वर्दी बच्चों के मन में मनोवैज्ञानिक भय पैदा नहीं करेंगे?  

 

यह कहते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाया कि पारिवारिक अदालतों में पीठासीन न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं को वर्दी में नहीं आना चाहिए. कहा कि पारिवारिक अदालतों में पीठासीन अधिकारी अदालती पोशाक में नहीं बैठेंगे. वकील काला कोट नहीं पहनेंगे.

 

पुलिस अधिकारी पुलिस की वर्दी पहन कर नहीं आएंगे, क्योंकि यह पूरा माहौल बच्चों के मन में भय पैदा करता है, खासकर तब जब वे किसी भी व्यवस्था के सबसे बुरे शिकार होते हैं.  

 

रोहिणी में नये परिवार न्यायालय परिसर के आधारशिला समारोह में CJI ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सुधार के संदर्भ में कई बातें कहीं.  

 

उन्होंने कहा,  मानवीय संबंधों को सुधारना, उनमें तर्क-वितर्क करना और उन्हें मजबूत करना ही उद्देश्य होना चाहिए. कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने भी अपने विचार रखे.   

 


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