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विनायक सपोर्ट सर्विसेज को आठ सप्ताह में लौटाया जाए कंपोजिशन यूजर फीस : हाईकोर्ट

Ranchi News : कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक मामले में राज्य सरकार के टोल टैक्स को अवैध करार दिया था. इसके खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी, जिसे बाद में राज्य सरकार ने वापस ले लिया था. ऐसे में कोयला ढुलाई  को लेकर प्रार्थी से 7 माह वसूले गए टोल टैक्स की राशि की उसे वापस होनी चाहिए.
 
झारखंड हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
  • कोयला ढुलाई में सीसीएल द्वारा टोल टैक्स की वसूली गई राशि की वापसी का मामला 

Ranchi News : कोयला ढुलाई में 7 माह में सीसीएल द्वारा वसूले गए टोल टैक्स की वापसी को लेकर दाखिल विनायक सपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की दो याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को कंपनी से वसूली गई कंपोजिशन यूजर फीस आठ सप्ताह के भीतर वापस करने का निर्देश दिया है. 

 

यह राशि कंपनी से सीधे या सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के माध्यम से वसूली गई थी. मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा.  

 

इससे पहले सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि याचिकाकर्ताओं से वसूली गई कंपोजिशन यूजर फीस आज से आठ सप्ताह के भीतर वापस कर दी जाएगी. कोर्ट ने सरकार के इस बयान को अंडरटेकिंग के रूप में स्वीकार कर लिया और दोनों रिट याचिकाओं का निष्पादित कर दिया.

 

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार के संबंधित अधिकारियों को इस अंडरटेकिंग का पालन करते हुए निर्धारित राशि याचिकाकर्ताओं को आठ सप्ताह के भीतर भुगतान करनी होगी.

 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने कोर्ट को बताया कि कंपनी एक सप्ताह के भीतर तीसरे प्रतिवादी यानी निदेशक, माइंस निदेशालय को अपने बैंक खाते का विवरण उपलब्ध करा देगी, ताकि वापस की जाने वाली राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा सके. 

 

दरअसल, राज्य सरकार के टोल टैक्स रूल 2021 के तहत सीसीएल ने कोयला ढुलाई करने वालों से टोल टैक्स की वसूली की थी. टोल टैक्स की राशि 7 महीने यानी 26 अक्टूबर 2021 से 15 अप्रैल 2022 तक 60 रूपए प्रति टन सीसीएल द्वारा कोयला ढुलाई करने वालों से वसूली गई थी. सुनवाई के दौरान सीसीएल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि टोल टैक्स की राशि उसने राज्य सरकार के पास जमा करा दी थी.

 

कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक मामले में राज्य सरकार के टोल टैक्स को अवैध करार दिया था. इसके खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी, जिसे बाद में राज्य सरकार ने वापस ले लिया था. ऐसे में कोयला ढुलाई  को लेकर प्रार्थी से 7 माह वसूले गए टोल टैक्स की राशि की उसे वापस होनी चाहिए.

 

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