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चिंताः डिजिटल व्यवस्था से झारखंड के गरीबों के निवाले पर गहराता संकट

Ranchi : विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर भोजन का अधिकार अभियान – झारखंड ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर राज्य में खाद्य सुरक्षा की वास्तविक स्थिति और डिजिटल प्रक्रियाओं से उत्पन्न संकट पर गंभीर चिंता जताई.

 

अभियान ने कहा कि 2013 में लागू राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य हर व्यक्ति को पर्याप्त और सस्ते दरों पर भोजन सुनिश्चित करना था, परंतु पिछले एक दशक में तकनीकी जटिलताओं और डिजिटल निगरानी ने गरीबों के भोजन के अधिकार को कमजोर कर दिया है.

 

डिजिटल निगरानी बनी गरीबों की नई दीवार

झारखंड जैसे गरीब और कुपोषण ग्रस्त राज्य में खाद्यान्न चोरी रोकने के नाम पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, आधार लिंकिंग, ई-केवाईसी, मोबाइल सत्यापन जैसी डिजिटल प्रक्रियाएं लागू की गई हैं. लेकिन इन तकनीकों ने गरीबों की परेशानी और बढ़ा दी है.

 

भोजन का अधिकार अभियान के अनुसार, 15 अक्टूबर 2025 तक झारखंड में लगभग 72.5 लाख राशन कार्ड सदस्यों का ई-केवाईसी लंबित है, जबकि 13.5 लाख सदस्यों के आधार नंबर राशन कार्ड से लिंक नहीं हैं. इससे गरीबों में यह भय है कि वे अपने खाद्यान्न अधिकार से पूरी तरह वंचित न हो जाए.

 

भूख और कुपोषण के भयावह आंकड़े

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019–21) के अनुसार 6 से 59 माह के 67.5% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं.15–49 वर्ष की 65.3% महिलाएं और 56.8% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं.

 

5 वर्ष से कम उम्र के 39.6% बच्चे अविकसित, जबकि 39.4% बच्चों का वजन उम्र के अनुसार कम है. हर 1,000 बच्चों में 28 बच्चे पांच वर्ष की आयु पूरी नहीं कर पाते.

 

डिजिटल बहिष्करण की पुनरावृत्ति

राशन कार्ड निरस्तीकरण में पारदर्शिता का अभाव
राज्य में हाल ही में बड़ी संख्या में राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं. 4 अगस्त 2025 तक 2.5 लाख कार्ड  डिलीट किए जा चुके हैं. कार्डधारकों को न तो पूर्व सूचना दी गई, न ही ग्राम सभाओं में सूचियां प्रदर्शित की गईं. लातेहार जिले के मनिका प्रखंड के मुंसी सिंह खेरवार जैसे कई पात्र लाभुकों के कार्ड बिना जांच ही रद्द कर दिए गए.

 

भोजन का अधिकार अभियान की प्रमुख मांगें

  • जन वितरण प्रणाली और आंगनवाड़ी में चल रहे बायोमेट्रिक/चेहरा आधारित ई-केवाईसी सत्यापन को तत्काल बंद किया जाए.
  • बिना सूचना व सत्यापन के राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए.
  • जिन लाभुकों का ई-केवाईसी या आधार सीडिंग नहीं हुआ है, उनके खाद्यान्न अधिकार सुरक्षित रखे जाएं.
  • पीडीएस में प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम राशन, हर माह दाल और खाद्य तेल दिया जाए.
  • आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को प्रतिदिन अंडा दिया जाए और टीएचआर बिना चेहरा सत्यापन के उपलब्ध कराया जाए.

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