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कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, अडानी समूह को भारत में बंदरगाहों के परिचालन की अनुमति क्यों, चांग चुंग-लिंग से क्या रिश्ता है

NewDelhi : कांग्रेस ने रविवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अडानी समूह के कथित चीनी जुड़ाव की ओर इशारा किया. पूछा कि इस समूह को अब भी भारत में बंदरगाह के परिचालन की अनुमति क्यों दी जा रही है. केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार ने 2022 में एपीएम टर्मिनल्स मैनेजमेंट और ताइवान की वान हाई लाइन्स के एक कंसोर्टियम को सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि विभिन्न एजेंसी को वान हाई के निदेशक और एक चीनी कंपनी के बीच संबंध का पता चला था. इसे भी पढ़ें : सिब्बल">https://lagatar.in/sibal-attacks-pm-every-day-said-about-modis-dynastic-remarks-bjp-does-politics-of-convenience/">सिब्बल

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अडानी समूह का चीनी कंपनियों से जुड़ाव नये सवाल खड़े करता है

रमेश ने एक बयान में कहा कि सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलने के कारण कंसोर्टियम जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण में एक कंटेनर हैंडलिंग टर्मिनल को संचालित करने के लिए बोली में शामिल नहीं हो सका. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह एक सरकारी नीति है, जिसके तहत चीनी जुड़ाव वाली कंपनियों और संस्थाओं को भारत में बंदरगाहों और टर्मिनल के परिचालन से रोका जा सके. रमेश ने आरोप लगाया, यह अडानी समूह के चीनी जुड़ाव के बारे में नये सवाल खड़े करता है. इसे भी पढ़ें : ज्यूडिशरी">https://lagatar.in/rijiju-said-on-relations-with-judiciary-efforts-are-being-made-to-create-confusion/">ज्यूडिशरी

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 अडानी समूह पर बिजली उपकरण घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा था

कहा कि हमने अपनी शृंखला ‘हम अडानी के हैं कौन’ में बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किये हैं. आरोप लगाया कि चीनी नागरिक चांग चुंग-लिंग की अडानी समूह के साथ करीबी निकटता है. कांग्रेस नेता ने दावा किया, उनका (चांग का) बेटा पीएमसी प्रोजेक्ट्स का मालिक है, इस कंपनी ने अडानी समूह के लिए बंदरगाहों, टर्मिनल, रेल लाइन, बिजली लाइन और अन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण किया है. कहा कि राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा अडानी समूह और पीएमसी पर 5,500 करोड़ रुपये के बिजली उपकरण घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया था.

विपक्ष अडानी मुद्दे की  JPC जांच की मांग पर अड़ा है

जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि अडानी समूह को शंघाई स्थित कम से कम दो जहाजरानी कंपनियों का संचालन करने के लिए जाना जाता है, जिनमें से एक कंपनीचीन के करीबी सहयोगी उत्तर कोरिया को पेट्रोलियम उत्पादों की अवैध बिक्री में शामिल थी. उन्होंने सवाल उठाया कि चीन से इतने करीबी संबंध होने के बावजूद अडानी समूह को भारत में बंदरगाहों के परिचालन की अनुमति क्यों दी जा रही है? बता दें कि अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा आरोप लगाये जाने के बाद से कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष अडानी मुद्दे की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग पर अड़ा है. wpse_comments_template]

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