रोजगार और महंगाई पर उठाए सवाल
सिन्हा ने कहा कि अगर ये 12 साल सच में इतने अच्छे होते तो देश का युवा रोजगार के लिए भटक नहीं रहा होता. किसान सड़कों पर आंदोलन नहीं करते और महंगाई ने आम घरों की कमर नहीं तोड़ी होती. उन्होंने कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन आज सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं.
विकास का फायदा किसे मिला
कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया. लेकिन असलियत यह है कि विकास का फायदा कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक ही सीमित रहा. आम जनता बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक तंगी से जूझती रही. उन्होंने यह भी कहा कि देश की संपत्तियां निजी हाथों में सौंपी जा रही हैं और पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रही हैं.
कांग्रेस ने गिनाई अपनी विरासत
राकेश सिन्हा ने कहा कि मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार जैसी योजनाएं कांग्रेस की देन हैं. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान भी कांग्रेस सरकारों ने बनाए. उन्होंने कहा कि आज का भारत उसी नींव पर खड़ा है, जो कांग्रेस ने बनाई थी.
लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता कमजोर हुई है. संसद की गरिमा घटी है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है. उन्होंने कहा कि असहमति को देशविरोध साबित करना भाजपा की आदत बन गई है. सिन्हा ने अंत में कहा कि देश की तरक्की का श्रेय किसी एक नेता या पार्टी को नहीं बल्कि देश के किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम नागरिकों को जाता है. कांग्रेस रोजगार, महंगाई, किसानों के अधिकार और संविधान की रक्षा के मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाती रहेगी.
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