डीसी ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि भविष्य में किसी भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर या स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित गड़बड़ी, गलत रिपोर्टिंग या व्यवस्था में कमी की शिकायत मिली, तो संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि हाल के दिनों में नारायणपुर प्रखंड के कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रसव की समुचित व्यवस्था नहीं होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में प्रसव दर्ज होने का मामला सामने आया था. वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य केंद्रों की जर्जर स्थिति, पेयजल व बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा रखरखाव मद में खर्च होने वाली राशि को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे.
इन खबरों के सामने आने के बाद ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. लोगों का आरोप है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है, लेकिन कागजों पर उपलब्धियां दिखाकर वास्तविक समस्याओं को छिपाया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराएं और जहां भी आधारभूत सुविधाओं की कमी है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर करें. प्रसव संबंधी आंकड़ों की भी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.
डीसी के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है. अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग केवल सुधार के दावे करता है, या फिर जमीनी स्तर पर भी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह सक्रियता दिखाता रहा, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेगी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
Leave a Comment