बड़े नेता ने राष्ट्रपति का अपमान किया : मोदी
30 जनवरी को आंदोलनरत कर्मियों से मिले थे ये लोग
आलोक दुबे ने बताया कि 30 जनवरी को ये लोग राजभवन के समक्ष अनशन पर बैठे चिकित्सा कर्मियों से मुलाकात की थी. इस दौरान इनके प्रतिनिधियों ने बताया था कि काम के हिसाब से उन्हें वेतन और सरकारी सुविधाएं नहीं मिलती है. महंगाई के इस युग में जो मानदेय मिलता है, उससे पेट पालना भी मुश्किल है. जबकि स्थायी कर्मियों की तुलना में अनुबंध पर कार्यरत कर्मी ज्यादा काम भी करते हैं और हमें 3 गुना तनख्वाह भी कम मिलता है. इन लोगों ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा कि आपके नेतृत्व में राज्य सरकार पुरानी पेंशन योजना, आंगनबाड़ी सेविका सहायिका, मनरेगा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि, पारा शिक्षकों के लिए बेहतर निर्णय लेने जैसे काम किए हैं. नियमितीकरण के मामले में भी कार्य शुरू हो चुके हैं. पारा चिकित्सा कर्मियों का कोरोना काल में योगदान अमूल्य, अतुलनीय है. ये सभी चिकित्सा कर्मी दक्ष लोग हैं और झारखंड के स्थायी निवासी हैं और सबसे बड़ी बात वास्तविकता में पारा चिकित्सा कर्मी असली कोरोना योद्धा हैं. इनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए इस दिशा में सकारात्मक पहल करने की मांग की है.अधिकारियों का रवैया समझ से परे
इनलोगों ने कहा कि आंदोलनकारियों के मामले में अधिकारियों का रवैया समझ से परे है. पिछले 22 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल व अनशन पर बैठे चिकित्सा कर्मियों से मिलने या संवाद स्थापित करने की पहल तक अधिकारियों ने नहीं की. इसे गंभीरतापूर्वक लेने की आवश्यकता है. इनलोगों ने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिर्फ पारा चिकित्सा कर्मियों की बात नहीं है, कहीं भी अधिकारी आंदोलनकारियों से बात करने में अपनी तौहीन समझते हैं. इसे भी पढ़ें : पहला">https://lagatar.in/first-test-from-thursday-india-eager-to-become-number-1-australia-eyeing-series-win-in-india-after-19-years/">पहलाटेस्ट गुरुवार से, भारत को नंबर-1 बनने की बेताबी, ऑस्ट्रेलिया की नजर 19 साल बाद भारत में सीरीज जीतने पर [wpse_comments_template]

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