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कांग्रेस प्रवक्ता बोले - झारखंड में 25 साल में 82,200 सड़क हादसों में हुए मौत

Ranchi News: नायक ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन या पुलिस विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें परिवहन, पुलिस, पथ निर्माण, स्वास्थ्य, नगर निकाय और जिला प्रशासन समेत कई विभागों की भूमिका है. उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए Education, Engineering, Enforcement और Emergency Care यानी चार ई' पर काम करने की जरूरत बताई.
 
कांग्रेस प्रवक्ता

Ranchi News: झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक कहा कि वर्ष 2000 से 2025 के बीच झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 82,200 लोगों की मौत हुई. 2021 से 2024 के बीच राज्य में 19,551 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 2021 में 3,871, 2022 में 5,174, 2023 में 5,315 और 2024 में 5,191 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. 2021 से 2024 के बीच राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2021 से 2023 के बीच तेज रफ्तार से जुड़े 12,213 हादसे दर्ज किए गए. नशे में वाहन चलाने से 337 दुर्घटनाएं होने की बात भी सामने आई.

 

हादसे से ज्यादा मौतों की चिंता

नायक ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन या पुलिस विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें परिवहन, पुलिस, पथ निर्माण, स्वास्थ्य, नगर निकाय और जिला प्रशासन समेत कई विभागों की भूमिका है. उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए Education, Engineering, Enforcement और Emergency Care यानी चार ई' पर काम करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि तेज गति, शराब पीकर वाहन चलाना, ओवरलोडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, खराब सड़क, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, वाहन की खराब फिटनेस और दुर्घटना के बाद समय पर इलाज नहीं मिलना मौत के कारण बन सकते हैं.

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हर जिले में ब्लैक स्पॉट का ऑडिट कराने की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने हर जिले में दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट का ऑडिट कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. सड़क की डिजाइन, मोड़, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट, साइनेज, स्पीड कंट्रोल और पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग की व्यवस्था की भी समीक्षा होनी चाहिए.

 

गोल्डन ऑवर में इलाज की व्यवस्था मजबूत करने की मांग

नायक ने कहा कि सड़क सुरक्षा का मतलब सिर्फ दुर्घटना रोकना नहीं, बल्कि दुर्घटना के बाद जान बचाना भी है. इसके लिए प्रमुख हाईवे पर एंबुलेंस की रणनीतिक तैनाती, ट्रॉमा सेंटर,प्रशिक्षित पैरामेडिक स्टाफ, हेल्पलाइन और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है. उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समितियों को भी सक्रिय करने की मांग की. 

 

हर घातक दुर्घटना की हो फेटल क्रैश ऑडिट

नायक ने प्रत्येक सड़क दुर्घटना की फेटल क्रैश ऑडिट' कराने की मांग की. ऑडिट में दुर्घटना का स्थान, कारण, सड़क की स्थिति, वाहन की फिटनेस, चालक की स्थिति, वाहन की गति, एंबुलेंस के पहुंचने का समय और दुर्घटनास्थल के पूर्व में ब्लैक स्पॉट होने जैसी जानकारी दर्ज होनी चाहिए.

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