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उप सेना प्रमुख के बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, कहा, सच सामने आया

जयराम रमेश ने लिखा कि पिछले पांच वर्षों से कांग्रेस संसद में भारत-चीन संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर बहस की मांग कर रही है, लेकिन मोदी सरकार लगातार इससे बचती रही है. उन्होंने कहा कि आगामी मानसून सत्र, जो 21 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है, उसमें कांग्रेस एक बार फिर यह मांग उठाएगी.
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 New Delhi  :  उप सेना प्रमुख (क्षमता विकास एवं संधारण) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने आज फिक्की द्वारा आयोजित न्यू एज मिलिट्री टेक्नोलॉजीज कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से हमें कुछ सबक मिले हैं. 

 

उप सेना प्रमुख के बयान को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने  एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जिस बात की चर्चा राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद ऑपरेशन सिंदूर के अचानक थमने को लेकर लगातार होती रही है, उसकी सार्वजनिक पुष्टि अब उप सेना प्रमुख  लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने कर दी है.

 

जनरल राहुल आर सिंह ने उन असाधारण तरीकों का जिक्र किया है, जिनके जरिए चीन ने पाकिस्तान वायुसेना की मदद की.यह वही चीन है जिसने पांच साल पहले लद्दाख में यथास्थिति(status quo) को पूरी तरह से बदल दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 19 जून 2020 को उसे सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दे दी.

 

जयराम रमेश ने लिखा कि पिछले पांच वर्षों से कांग्रेस संसद में भारत-चीन संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर बहस की मांग कर रही है, लेकिन मोदी सरकार लगातार इससे बचती रही है. उन्होंने कहा कि आगामी मानसून सत्र, जो 21 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है, उसमें कांग्रेस एक बार फिर यह मांग उठाएगी.

 

 

अब तो मोदी सरकार को कम-से-कम यह मांग मान लेनी चाहिए, ताकि चीन से उत्पन्न भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामूहिक जवाब देने के लिए एक राष्ट्रीय सहमति बनाई जा सके, जो भारत पर सीधे और पाकिस्तान के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल रही है.

 

उन्होंने कहा कि हाल ही में चीन ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ कुनमिंग में एक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की. जयराम रमेश ने लिखा कि भारत का व्यापार घाटा चीन के साथ अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है.   सीमा को लेकर जो नया समझौता हुआ है, वह किसी भी रूप में पुरानी यथास्थिति की बहाली नहीं है.  

  

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