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संभल मजिस्ट्रेट के तबादले को कांग्रेस ने न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया. सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले

पवन खेड़ा ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा,  डीजी वंजारा, माया कोडनानी या बाबू बजरंगी जैसे तमाम लोगों को जज बदलकर राहत दी गयी है.   ऐसा मॉडल लोकतंत्र और इंसाफ के लिए बेहद घातक है. ऐसे में जब वकील समुदाय ने लोकतंत्र और इंसाफ को बचाने के लिए मुहिम शुरू की है तो हम उसका स्वागत करते हैं.
 

New Delhi : उत्तर प्रदेश में संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के  ट्रांसफर को लेकर कांग्रेस ने आज शनिवार को यूपी की भाजपा पर हल्ला बोला. कांग्रेस ने इसे सीधे न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया.  कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया.

 

 
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को खुले आम नष्ट कर एक बार फिर अपने जनविरोधी, संविधान विरोधी, सत्तावादी और क्रूर निरंकुश चरित्र को उजागर किया है.


आरोप लगाया कि संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का अचानक स्थानांतरण प्रशासनिक नहीं, संस्थागतवाद का एक सोचा-समझा कार्य है. यह न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है.


उन्होंने कहा कि भाजपा का खतरनाक राजनीतिक फॉर्मूला है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करो, राज्य में हिंसा फैलाओ, अपराधियों की रक्षा करो और फिर जवाबदेही मांगने की हिम्मत करने वाली किसी भी संस्था को कुचल दो. 

 
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के तबादले का उल्लेख करते हुए पवन खेड़ा ने कहा, तथाकथित डबल इंजन की भाजपा सरकार ने न्यायपालिका को डराने, पालतू बनाने और अंततः उस पर कब्जा करने का प्रयास किया है.


विभांशु सुधीर का स्थानांतरण इस बात का कॉपीबुक उदाहरण है कि सत्तारूढ़ दल ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए न्याय तंत्र को कैसे हाईजैक कर लिया है. संभल में सांप्रदायिक हिंसा अनायास नहीं थी. यह भाजपा सरकार की नफरत, ध्रुवीकरण की राजनीति का सीधा परिणाम थी.


उन्होंने दावा किया कि संभल हिंसा के दौरान पुलिस प्रशासन ने अंधाधुंध और लापरवाही'से गोलीबारी की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गयी.  पवन खेड़ा ने कहा कि9 जनवरी को संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में सुधीर ने गोलीबारी की घटना को लेकर विवादास्पद पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.


श्री खेड़ा ने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ने की अनुमति देने के बजाय, भाजपा सरकार ने सुनिश्चित किया कि न्यायाधीश को तुरंत हटा दिया जाये. और ऐसा किया गया भी. उन्होंने स्थानांतरण को दंडात्मक कार्रवाई करार देते हुए कहा, इसका उद्देश्य न्यायपालिका को साफ संदेश देना है कि आपको इसकी कीमत(FIR दर्ज कराने की) चुकानी पड़ेगी.


पवन खेड़ा ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा,  डीजी वंजारा, माया कोडनानी या बाबू बजरंगी जैसे तमाम लोगों को जज बदलकर राहत दी गयी है.   ऐसा मॉडल लोकतंत्र और इंसाफ के लिए बेहद घातक है. ऐसे में जब वकील समुदाय ने लोकतंत्र और इंसाफ को बचाने के लिए मुहिम शुरू की है तो हम उसका स्वागत करते हैं. 

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