Ranchi : गुमला जिले में रेलवे स्टेशन के पास सड़क चौड़ीकरण के टेंडर से संबंधित संविदात्मक विवाद (Contractual dispute) से जुड़े अवमानना याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को हुई. मामले में नगर विकास सचिव सुनील कुमार कोर्ट में हाजिर हुए.
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दाखिल किया है.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार के समय देने के आग्रह को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद निर्धारित की. अब अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी.
खंडपीठ ने अगली सुनवाई में नगर विकास सचिव को कोर्ट में उपस्थित होने से छूट दी है. बता दें कि प्रार्थी मेसर्स विनोद कुमार जैन की ओर से मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ का आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका याचिका दाखिल की गई है.
दरअसल गुमला जिले में रेलवे स्टेशन के निकट सड़क चौड़ीकरण का टेंडर दिया गया था. इसमें यह बात निर्धारित की गई थी कि यदि वर्क आर्डर समय से पहले पूरा कर लिया जाएगा तो कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) को बोनस दिया जाएगा.
कॉन्ट्रैक्टर ने काम पूरा कर लिए जाने का दावा किया और टेंडर शर्त के अनुसार अपने बोनस की मांग की. रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के चीफ इंजीनियर ने भी कॉन्ट्रैक्टर को बोनस देने की अनुशंसा कर दी. लेकिन राज्य सरकार ने स्थल निरीक्षण में मेजरमेंट लिए जाने के दौरान पाया कि दिए गए टेंडर का कार्य पूरा नहीं हुआ है.
कॉन्ट्रैक्टर ने बोनस दिलाने का आग्रह करते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी, जिस पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 12% ब्याज के साथ बोनस भुगतान करने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल किया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें



Leave a Comment