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देशी शराब बनाने वाली कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट का परमिट देने पर विवाद

मॉल्ट स्पिरिट(Malt Spirit) का इस्तेमाल भारत निर्मित विदेशी शराब (IMFL)  बनाने में किया जाता है. लेकिन उत्पाद विभाग ने देशी शराब बनाने वाली कुछ कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट(Malt Spirit) का परमिट दे दिया है. इसकी वजह से राज्य के शराब उत्पादकों और विभाग के बीच विवाद शुरू हो गया है. साथ ही शराब उत्पादकों के बीच असंतोष है.
 

Ranchi: मॉल्ट स्पिरिट(Malt Spirit) का इस्तेमाल भारत निर्मित विदेशी शराब (IMFL)  बनाने में किया जाता है. लेकिन उत्पाद विभाग ने देशी शराब बनाने वाली कुछ कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट(Malt Spirit) का परमिट दे दिया है. इसकी वजह से राज्य के शराब उत्पादकों और विभाग के बीच विवाद शुरू हो गया है. साथ ही शराब उत्पादकों के बीच असंतोष है.


राज्य में देशी शराब (25 डिग्री) बनाने में एक्ट्रा न्यूट्रल अलकोहल (ENA) का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा कैरेमल और फ्लेवर आदि का इस्तेमाल किया जाता है. राज्य में भारत निर्मित विदेशी शराब बनाने वाली कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट (Malt Spirit) का परमिट दिया जाता है. इसके आधार पर विदेशी शराब बनाने वाली कंपनियां मॉल्ट स्पिरिट खरीदती हैं और शराब बनाने में इस्तेमाल करती हैं. देशी शराब (25डिग्री) बनाने वाली कंपनियों के विभाग द्वारा ENA का परमिट दिया जाता है. देशी शराब (25डिग्री) बनाने वाली कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं.


लेकिन उत्पाद विभाग ने देशी शराब (25 डिग्री) बनाने वाली कुछ कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट का परमिट दे दिया है. इसकी जानकारी मिलने के बाद देशी शराब बनाने वाली कुछ कंपनियों ने विभाग से मॉल्ट स्पिरिट का परमिट मांगा. लेकिन उन्हें परमिट देने से इनकार कर दिया गया. इससे देशी शराब बनाने वालों के बीच असंतोष पैदा हुआ है. असंतोष की वजह देशी शराब बनाने वाली दूसरी कंपनियों का व्यापारिक गतिविधि प्रभावित होना बताया जाता है.


शराब बनाने वाली कंपनियों से जुड़े लोगों के कहना है विदेशी शराब बनाने में इस्तेमाल किये जाने वाले मॉल्ट स्पिरिट की कीमत 400-500 रुपये प्रति लीटर है. देशी शराब निर्माण में इस्तेमाल किये जाने वाले ENA  की कीमत लगभग 80-85 रुपये प्रति लीटर है. देशी शराब (25 डिग्री) बनाने के दौरान थोड़ा सा माल्ट स्पिरिट मिला देने से उसका स्वादि आदि बढ़ जाता है.

 

इससे सिर्फ ENA  के इस्तेमाल से बनी देशी शराब की बिक्री प्रभावित होती है. देशी शराब बनाने वाली दूसरी कंपनियों का यह आरोप है कि जिन्हें माल्ट स्पिरिट का परमिट मिला है, वे इसका इस्तेमाल देशी शराब (25 डिग्री) बनाने में कर रहे हैं. लेकिन अपने ब्रांड के लेबल और शराब बनाने में इस्तेमाल की गयी सामग्रियों की सूची में इसका उल्लेख नहीं कर रहे हैं. इससे बाजार के एक बड़े हिस्से पर ऐसी कंपनियों का कब्जा हो गया है.

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