Pakur News: पाकुड़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने महेशपुर थाना कांड संख्या 169/2023 में सोबेन मरांडी को हत्या और जानलेवा हमले का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. मामले की सुनवाई के दौरान जांच में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और आदेश की प्रति झारखंड के डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया है.
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अभियोजन के अनुसार, सोबेन मरांडी की मुलाकात सूचिका टुडू से एक आदिवासी मेले में कार्यक्रम के दौरान हुई थी. इसके बाद दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने लगी. आरोपी युवती से शादी करना चाहता था, लेकिन उसके माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे. इसी विरोध से नाराज होकर आरोपी ने कथित तौर पर रात में सूचिका के घर में घुसकर उसके पिता मदन टुडू पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले में मदन टुडू की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी रोशो मुर्मू गंभीर रूप से घायल हो गईं.
सुनवाई के दौरान पुलिस अनुसंधान की कई कमियां सामने आईं. जांच अधिकारी कैला उरांव ने जब्त किए गए कथित हथियार और खून से सने कपड़ों को अदालत में प्रस्तुत नहीं किया. इनकी फॉरेंसिक जांच भी नहीं कराई गई. घायल रोशो मुर्मू की इंजरी रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई. कुछ गवाहों के बयान से मुकरने के बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की गंभीरता से पड़ताल की.
अदालत ने जांच अधिकारी की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए इसे घोर लापरवाही माना. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में पुलिस की चूक के कारण अपराध के दोषी को लाभ नहीं मिलना चाहिए. इसी गंभीर टिप्पणी के साथ फैसले की प्रति डीजीपी को भेजने का आदेश दिया गया है, ताकि पुलिस जांच में हुई लापरवाही पर उच्च स्तर से संज्ञान लिया जा सके.
मामले में अभियोजन की ओर से कुल पांच गवाह पेश किए गए. लोक अभियोजक लुकास कुमार हेमरम ने अदालत में मजबूत दलील रखते हुए कहा कि जांच अधिकारी की कमियों के कारण न्याय प्रभावित नहीं होना चाहिए.
अदालत ने मामले में घायल प्रत्यक्षदर्शी रोशो मुर्मू से सीधे सवाल किए. उन्होंने घटना और अपने ऊपर हुए हमले के बारे में अदालत के समक्ष स्पष्ट जानकारी दी. कोर्ट ने उनकी मौखिक गवाही को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध माना.
कोर्ट ने सोबेन मरांडी को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माना, धारा 307 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 326 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 452 के तहत 5 वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना सुनाया है.
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. कुल 2 लाख रुपये की जुर्माना राशि पीड़िता रोशो मुर्मू को देने का आदेश दिया गया है. साथ ही डीएलएसए, पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता को उचित अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है.
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