Ranchi News : हरिशरण देवगन द्वारा दायर याचिका में सिर्फ 14वीं JPSC और JSSC-CGL-24 परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग की गयी है. साथ ही सीआईडी को जांच के दौरान जब्त किये गये दस्तावेज को सुरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिकादाता ने अपनी साख का उल्लेख करते हुए यह भी कहा है कि उसकी सालाना आमदनी 50 लाख रुपये है.
हरिशरण देवगन ने राज्य में हुए नियुक्ति घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की है. उनकी याचिका पर 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहना की पीठ में सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान याचिकादाता की ओर से सीबीआई और न्यायिक जांच की मांग की गयी थी. न्यायालय ने सुनवाई के दौरान न्यायिक जांच के मामले को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि याचिका में वर्णित तथ्यों के आधार पर फॉरेंसिक जांच की जरूरत होगी, इसलिए न्यायिक जांच संभव नहीं है. साथ ही न्यायालय ने सीबीआई जांच की मांग पर राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करने का आदेश दिया.
उल्लेखनीय है कि झारखंड में नियुक्ति घोटाले के आरोपों और आंदोलन के मद्देनजर सरकार ने 18 अगस्त को आदेश जारी कर कुल 22 परीक्षाओं के विज्ञापनों को रद्द कर दिया. छह नियुक्ति प्रक्रिया को स्थगित कर दी और 17 परीक्षाओं में अनियमितता की आशंकाओं के मद्देनजर जांच के दायरे में शामिल किया. नियुक्ति घोटाले में सीआईडी ने प्राथमिकी (16/26) दर्ज की है. जांच के दौरान JPSC और JSSC कार्यालय में छापामारी हुई. इस दौरान JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
सरकार ने आंदोलनरत छात्रों की मांगों के मद्देनजर नियुक्ति परीक्षाएं रद्द कर दी. लेकिन सीबीआई जांच पर सहमति नहीं दी. इस बीच दिल्ली निवासी हरिशरण देवगन ने नियुक्ति घोटाले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. लेकिन इसमें सिर्फ 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रकाशित विज्ञापन (1/26) के माध्यम से 103 पदों के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग की गयी है. इसके अलावा JSSC-CGL परीक्षा में हुई गड़बड़ी और CID जांच के मद्देनजर इसे भी शामिल करने का अनुरोध किया गया है.
याचिकादाता की ओर से CID की चर्चा करते हुए कहा गया है कि उसे CID के अधिकारियों की नीयत या इमानदारी पर शक नहीं है. लेकिन CID द्वारा जांच करना असरदार उपाय नहीं है, क्योंकि इसमें राज्य की भर्ती संस्थाओं की अनियमितता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता का मामला जुड़ा हुआ है, इसलिए सीबीआई जांच ही बेहतर है.
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