- अभियुक्त ने एक माह एक दिन की अवधि जेल में बिताई है
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से दोषी ठहराये गये समीर कुमार चौधरी की अपील को मेरिट पर खारिज कर दिया है. हालांकि अदालत ने तीन दशक पुराने मामले और आरोपी के पहले से भुगते गये कारावास को देखते हुए उसकी सजा को घटाकर जितनी अवधि वह जेल में रह चुका है, उतनी कर दिया.
हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने समीर कुमार चौधरी की क्रिमिनल अपील पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी द्वारा पीएफ बकाया भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 300 रुपये की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से साबित करने में सफल रहा.
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दरअसल यह मामला वर्ष 1993 का है. आरोप है कि फंड क्लर्क समीर कुमार चौधरी ने शिकायतकर्ता रामधारी हरिजन, जो बीसीसीएल की बसुदेवपुर कोलियरी में एक्स-माइनर लोडर थे, उनके सीएमपीएफ एरियर भुगतान के आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए 300 रुपये रिश्वत की मांग की थी.
सीबीआई की विशेष अदालत, धनबाद ने 26 फरवरी 2005 को अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक अपराध के लिए दो वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी थी. अदालत ने माना कि घटना वर्ष 1993 की है और आरोपी लगभग 33 वर्षों से मुकदमे की पीड़ा झेल रहा है. उसने एक माह एक दिन की हिरासत भी भुगती है और कुल 7,000 रुपये जमा किये हैं, जिसमें 2,000 रुपये जुर्माना और जमानत की पुष्टि के लिए जमा किये गये 5,000 रुपये शामिल हैं. अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए माना कि आरोपी पर्याप्त दंड भुगत चुका है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहले से जमानत पर था, इसलिए उसके जमानत बॉन्ड और जमानतदारों को मुक्त कर दिया गया.
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