Search

 
 
 

Court News: 200 रुपये रिश्वत मामले में 39 साल बाद आरोपी बरी

200 रुपये रिश्वत के आरोपी 39 साल की कानूनी लड़ाई के बाद भोलू मंडल बरी हो गया. झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 39 वर्ष पुराने सीबीआई ट्रैप मामले में धनबाद के बासंतीमाता कोलियरी के कर्मचारी भोलू मंडल को रिश्वतखोरी के आरोप से बरी कर दिया.
 
कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi: 200 रुपये रिश्वत के आरोपी 39 साल की कानूनी लड़ाई के बाद भोलू मंडल बरी हो गया. झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 39 वर्ष पुराने सीबीआई ट्रैप मामले में धनबाद के बासंतीमाता कोलियरी के कर्मचारी भोलू मंडल को रिश्वतखोरी के आरोप से बरी कर दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की बेंच ने 2002 में सुनाई गई सीबीआई धनबाद कोर्ट के दो वर्ष के कारावास की सजा को रद्द कर दिया है. 


कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वत की मांग सिद्ध होना अनिवार्य है. केवल रिश्वत की राशि की बरामदगी या स्वीकार करना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है. हाईकोर्ट ने भोलू मंडल की क्रिमिनल अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया.

 

इसे भी पढ़ें:


दरअसल, यह मामला वर्ष 1987 का था. आरोप था कि मृत कर्मचारी की भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी की राशि जारी कराने के लिए भोलू मंडल ने 200 रुपये तथा एक अन्य कर्मचारी डब्ल्यू.एच. खान ने 300 रुपये रिश्वत की मांग की थी. सीबीआई ने ट्रैप बिछाकर दोनों को गिरफ्तार किया था. विशेष अदालत ने भोलू मंडल को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष की सश्रम कारावास और 300 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.


हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई में पाया कि शिकायतकर्ता सुखलाल दास की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उनका बयान दर्ज नहीं हो सका. वहीं, ट्रैप के स्वतंत्र गवाह और शैडो विटनेस महादेव मिंज अपने पूर्व बयान से मुकर गए. अदालत ने यह भी पाया कि स्वतंत्र गवाहों और सीबीआई अधिकारियों के बयानों में रिश्वत की मांग और लेन-देन के संबंध में गंभीर विरोधाभास हैं. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

 

 

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही