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Court News : बिनय कुमार महतो की मौत का राज नहीं सुलझा सकी CBI, अदालत में दायर किया क्लोजर रिपोर्ट

  • सीबीआई ने किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या हत्या की साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं पाया
  • इसे 'एक्सीडेंटल डेथ' यानी हादसा होने की संभावना जताई है

Ranchi: सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र बिनय कुमार महतो की मौत के पीछे का राज सीबीआई भी नहीं सुलझा सकी है. आखिरकार सीबीआई के लिए यह हत्याकांड अबूझ पहेली बन गई. इस हत्याकांड मामले में सीबीआई ने अपने हाथ खड़े करते हुए सीबीआई की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है.

 

इस मामले में सीबीआई ने किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या हत्या की साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं पाया है. सीबीआई ने इसे 'एक्सीडेंटल डेथ' यानी हादसा होने की संभावना जताई है. अदालत से क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने का अनुरोध अनुसंधानकर्ता द्वारा किया गया है.  

 

सीबीआई ने 4 वर्ष से अधिक समय से सारी तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर अनुसंधान के बाद इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की है.  दरअसल, बिनय महतो के पिता मनबहाल महतो ने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 
 

हाईकोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जुलाई 2022 में मामले को सीबीआई को सौंप दिया था. इसके बाद सीबीआई ने मामले में अनुसंधान शुरू करते हुए सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर जांच की. घटनास्थल का कई बार 'रिक्रिएशन' किया और स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का भी गहन अध्ययन किया.  

 

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट की माने तो 5 फरवरी 2016 की रात 1:01:14 बजे बिनय महतो अपने बॉयज हॉस्टल से बाहर निकला था और महज 3 मिनट 48 सेकंड के भीतर, यानी 1:05:02 बजे वह स्टाफ क्वार्टर (विंग-ए) से नीचे गिर गया. रिपोर्ट में सीबीआई ने बताया है कि हॉस्टल और प्रिंसिपल के आवास के बीच लगे कैमरों में बिनय का पीछा करता हुआ कोई दूसरा व्यक्ति नजर नहीं आया.

 

स्टाफ क्वार्टर और हॉस्टल के बीच की दूरी लगभग 480 मीटर है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इतने कम समय में किसी द्वारा उसे ले जाना या वहां कोई संघर्ष होना साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं होता है.  

 

दूसरी ओर पुलिस ने शुरुआती जांच में स्कूल की ही एक शिक्षिका के नाबालिग बेटे को आरोपी बनाया था और इसे प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला माना था. बिनय के पिता मनबहाल महतो ने पुलिस के इस अनुसंधान को सही दिशा वाला नहीं माना था और कहा था कि उनके बच्चे की इस हत्या की घटना की लीपापोती के लिए ऐसा किया जा रहा है.

 

वहीं, अब सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद मृतक बच्चे के परिजनों के हाथ खाली रह गए. इधर, बताया जा रहा है कि सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने का मतलब केस का पूरी तरह बंद होना नहीं है.  

 

अदालत तय करेगी कि वह सीबीआई के निष्कर्षों से सहमत है या नहीं. यदि पीड़ित परिवार 'प्रोटेस्ट पिटीशन' दायर हुआ है, तो अदालत इस हत्याकांड में सीबीआई  के क्लोजर रिपोर्ट पर कोई नया आदेश भी पारित कर सकती है.

 

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