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Court News: कांस्टेबल कैडर सिपाहियों के ACP लाभ मामले में सरकार की अपील हाईकोर्ट से निष्पादित

Ranchi: कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों व हवलदारों को एसीपी के लाभ देने से संबंधित हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील (LPA) पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर शंकर की खंडपीठ ने  राज्य सरकार की अपील निष्पादित कर दी. मामले में प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने पक्ष रखा.
 

Ranchi: कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों व हवलदारों को एसीपी के लाभ देने से संबंधित हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील (LPA) पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर शंकर की खंडपीठ ने  राज्य सरकार की अपील निष्पादित कर दी. मामले में प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने पक्ष रखा.


दरअसल हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति अंबुज नाथ की अदालत ने प्रार्थी की दाखिल याचिका को स्वीकार किया था. एकल पीठ के 16 .08 2024 के आदेश पारित कर डीजीपी द्वारा सिपाहियों के लिए एसीपी लाभ में लगाई गई तीनों शर्तों को निरस्त कर दिया था. साथ ही कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों को एसीपी का लाभ ससमय देने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि कार्यरत और सेवानिवृत्त सिपाहियों और हवलदारों को उनकी देय तिथि से बिना किसी शर्त के एसीपी का लाभ दिया जाए.

 

एकल पीठ में प्रार्थी का क्या था पक्ष


एकल पीठ में सुनवाई के दौरान प्रार्थी ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने कोर्ट को बताया था कि कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों व हवलदारों को एसीपी का लाभ तभी मिलेगा, जब वह ट्रेनिंग पास कर जाएंगे, इसे चुनौती दी गई थी. बाद में डीजीपी ने तीन शर्त लगा दी जो गलत है. पहली शर्त लगाई गई थी कि यदि सिपाही स्वेच्छा से ट्रेनिंग में नहीं जाते हैं या पहली बार में ट्रेनिंग पास नहीं करते हैं, तो उन्हें एसीपी का लाभ नहीं मिलेगा. प्रार्थी ने इन शर्त को गलत बताते हुए निरस्त करने का आग्रह किया था, जिसे एकल पीठ ने स्वीकार कर लिया था.

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