Search

 
 
 

Court News: निर्मल महतो हत्याकांड, राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के निर्णय को HC ने किया निरस्त

झामुमो नेता निर्मल महतो हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नरेंद्र सिंह दीक्षित की समय-पूर्व रिहाई (प्रीमैच्योर रिलीज) से संबंधित राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के निर्णय को झारखंड हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है.
 
कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता निर्मल महतो हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित की समयपूर्व रिहाई की अर्जी खारिज करने वाले राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के 28 मार्च 2025 के आदेश को रद्द कर दिया है.

 

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की कोर्ट ने कहा कि बोर्ड ने राज्य सरकार की नीति में निर्धारित मानकों पर विचार किए बिना केवल अपराध की प्रकृति के आधार पर याचिकाकर्ता का दावा खारिज कर दिया, जो कानून सम्मत नहीं है.

 

इसे भी पढ़ें:

 

याचिकाकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत आजीवन कारावास की सजा हुई थी. उसने बताया कि वह लगभग 23 वर्ष की वास्तविक कैद तथा रिमिशन सहित 29 वर्ष की सजा पूरी कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट भी 3 जुलाई 2023 को राज्य सरकार को उसकी रिमिशन याचिका पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दे चुका था.

 

कोर्ट ने पाया कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने याचिकाकर्ता की रिहाई यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि वह एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की राजनीतिक हत्या का दोषी है और उसकी रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास प्रभावित होगा.

 

कोर्ट ने कहा कि 26 मई 2011 की राज्य सरकार की नीति के अनुसार बोर्ड को पांच निर्धारित मानकों पर संतुष्ट होना आवश्यक है. इनमें अपराध का सामाजिक प्रभाव, भविष्य में अपराध करने की संभावना, अपराध की पुनरावृत्ति की आशंका कम होना, आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता तथा दोषी की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति जैसे पहलुओं का मूल्यांकन शामिल है.

 

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड में प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट समयपूर्व रिहाई के पक्ष में थी, लेकिन बोर्ड ने नीति के आवश्यक मानकों पर समुचित विचार नहीं किया और केवल अपराध की प्रकृति को आधार बना लिया.

 

कोर्ट ने 28 मार्च 2025 की अधिसूचना (मेमो संख्या 1397) को रद्द करते हुए मामले को राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के पास वापस भेज दिया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि बोर्ड 26 मई 2011 की नीति के सभी मानकों के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले पर नए सिरे से विचार करे और तीन महीने के भीतर निर्णय ले. इसके साथ ही अदालत ने याचिका स्वीकार कर लिया. 

 

तीन को हुई थी उम्र कैद

8 अगस्त, 1987 को जमशेदपुर के चमरिया (टाटा स्टील) गेस्ट हाउस के समीप निर्मल महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. 18 नवंबर, 1987 को इस मामले की जांच सीबीआइ को दे दी गयी. वर्ष 2001 में धीरेंद्र सिंह और 2003 में  नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित की गिरफ्तारी हुई थी.

 

इस मामले में पूर्व सांसद सूरज मंडल की सूचना पर बिष्टुपुर थाने में केस दर्ज किया गया था. निर्मल महतो हत्याकांड में नरेंद्र सिंह समेत तीन लोगों को उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी, जिसमें वीरेंद्र सिंह की जेल में रहने के दौरान मौत हो चुकी है. हत्या के दोषियों की उम्रकैद की सजा फरवरी 2017 में झारखंड हाइकोर्ट ने बरकरार रखी थी.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही