Ranchi : सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर प्रमोशन देने से संबंधित एकल पीठ के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम (JBVNL) की अपील पर सुनवाई करते हुए निगम को राहत प्रदान की है.
JBVNL ने एकल पीठ के 16 दिसंबर 2025 को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसने अशुकरु खड़िया और गोपाल माझी को एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर प्रमोशन देने का निर्देश दिया गया था. साथ ही झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जनरल कैडर रूल 1976 में संशोधन का भी आदेश दिया था.
प्रतिवादी की नियुक्ति बिजली विभाग में वर्ष 1984 में जूनियर इंजीनियर पद पर हुई थी. इसके बाद प्रोन्नति पाकर वह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पद तक पहुंचा था. उसने एकल पीठ में रिट याचिका दाखिल कर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर प्रोन्नति का आग्रह किया था.
दरअसल रूल के तहत सुपरीटेंडेंट इंजीनियर पद पर उसी को प्रोन्नति दी जाती है, जिसने इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है. प्रतिवादी डिप्लोमा होल्डर थे, जिस कारण झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम की ओर से प्रतिवादियों को सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर प्रमोशन नहीं दिया जा रहा था. झारखंड बिजली वितरण निगम की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा.
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