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Court News : लैंड सर्वे मामले में राजस्व सचिव दाखिल करें शपथ पत्र, नए डेवलपमेंट हो तो उसे भी बताएं : हाईकोर्ट

राज्य में हो रहे जमीन के सर्वे को लेकर दायर गोकुल चंद की जनहित याचिका पर  झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले सुनवाई में जब राजस्व ,पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को जवाब दाखिल करना था तो विभागीय अवर सचिव ने क्यों शपथ पत्र दाखिल किया?
 
हाईकोर्ट
  • कोर्ट ने जताई नाराजगी
  • सचिव को जवाब दाखिल करना था तो अवर सचिव ने शपथ पत्र क्यों दाखिल किया?

Ranchi :  राज्य में हो रहे जमीन के सर्वे को लेकर दायर गोकुल चंद की जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछलेीसुनवाई में जब राजस्व ,पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को जवाब दाखिल करने को कहा गया था तो विभागीय अवर सचिव ने क्यों शपथ पत्र दाखिल किया?  

 

साथ ही अदालत ने राजस्व, पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को 15 जुलाई तक शपथ पत्र दाखिल करने और उसमें कुछ नए डेवलपमेंट हुए हैं तो उसकी भी जानकारी देने को कहा है. अब कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को करेगी.

 

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा है कि झारखंड में लैंड सर्वे का काम सभी जिलों में कब तक पूरा होगा. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रत्युष शौनिकय ने पक्ष रखा. 

 

 

इससे पहले सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि 17 जून 2025 को कोर्ट ने राजस्व ,पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को चार सप्ताह में लैंड सर्वे से संबंधित नई टेक्नोलॉजी का काम पूरा करने को कहा था. वहीं इसके 6 माह के भीतर झारखंड के सभी जिलों में लैंड सर्वे का काम पूरा करने को कहा गया था. 

 

लेकिन कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं हुआ है. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहित राय ने कोर्ट से समय की मांग की. उन्होंने कहा कि सचिव द्वारा शपथ पत्र दाखिल किया जाएगा.

 

दरअसल सरकार की ओर से शपथ पर दाखिल कर बताया गया था कि झारखंड सरकार दूसरे राज्यों केरल, कर्नाटक आदि राज्यों के लैंड सर्वे की नई टेक्नोलॉजी का अध्ययन कर रही है. इस नई टेक्नोलॉजी में पुराने डाटा को डालकर झारखंड में लैंड सर्वे का काम तेजी से किया जाएगा. 

 

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि झारखंड में लैंड सर्वे के लिए जो टेक्नोलॉजी वर्तमान में है, वह काफी पुरानी है, इसलिए लैंड सर्वे पूरा करने में परेशानी आ रही है. जिसपर कोर्ट ने सरकार से कहा था कि झारखंड में लैंड सर्वे समय से पूरा होने से आम लोगों की जमीन के साथ-साथ सरकार की जमीन की सुरक्षा संभव होगी.

 

बताते चलें कि झारखंड में 1975 से भूमि सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ हुआ था, जो आज 50 साल हो जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है. लैंड सर्वे पूरा करने के लिए कर्मियों की नियुक्ति एवं टेक्नोलॉजी को एडवांस करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए. सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दो- तीन जिलों में लैंड सर्वे का काम पूरा हो गया है. 

 

गौरतलब है कि प्रार्थी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 में भूमि का सर्वे हुआ था. इसके बाद झारखंड में 1980 से भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी. वहीं सरकार ने बताया था कि राज्य में सर्वे का काम चल रहा है. दो जिला लातेहार व लोहरदगा में सर्वे पूरा हो गया है.

 

 

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