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Court News:  झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद में SC का हस्तक्षेप से इनकार

कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव से जुड़े विवाद में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फिलहाल मामले में दखल देने का उचित समय नहीं है.

 

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प्रयाग महतो द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा 2 जून 2026 को पारित आदेश का संज्ञान लिया. बीसीआई ने चुनाव विवाद को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी को भेज दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने समिति से अनुरोध किया कि वह चुनाव विवाद का यथाशीघ्र और दो सप्ताह के भीतर निस्तारण करे.

 

साथ ही, याचिकाकर्ता प्रयाग महतो को समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपनी सभी शिकायतें, बीसीआई के आदेश को चुनौती सहित, रखने की अनुमति दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है. इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका का निष्पादित कर दिया.


बता दें कि झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में अधिवक्ता महेश तिवारी ने जीत का निर्धारित कोटा पार कर लिया था. लेकिन चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने रांची की निचली अदालत द्वारा अधिवक्ता महेश तिवारी को एक मामले में 2 साल की सजा सुनाए जाने को देखते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. 

 

इसके बाद  प्रयाग महतो को चुना गया था. जिसके बाद अधिवक्ता महेश तिवारी ने स्टेट बार काउंसिल चुनाव में उम्मीदवारी रद्द करने को लेकर चीफ रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को हाई पावर इलेक्शन कमेटी में चुनौती दी थी. यह तीन सदस्य वाली हाई पावर इलेक्शन कमेटी में वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ मृदुल (सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस मणिपुर) की चेयरमैनशिप वाली थी. 

 

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में उम्मीदवारी रद्द करने से संबंधित के रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ  के आदेश को चुनौती देने वाली वकील महेश तिवारी की अपील न्यायिक समिति ने खारिज कर दी है. इसके बाद में अधिवक्ता महेश तिवारी ने इलेक्शन रूल का हवाला देते हुए चीफ रिटर्निंग ऑफिसर के पावर को चुनौती देते हुए बार काउंसिल आफ इंडिया के समक्ष अपना रिप्रेजेंटेशन दिया था. बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने उन्हें राहत देते हुए हाई पावर इलेक्शन  कमेटी के आदेश पर रोक लगा दी है. जिसे प्रयाग महतो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

 

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